आज का श्लोक

आज का श्लोक गुरुवार, 3 सितंबर 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

ऋग्वेद 1.164.46

इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुरथो दिव्यः स सुपर्णो गरुत्मान् ।indraṃ mitraṃ varuṇamagnimāhuratho divyaḥ sa suparṇo garutmān |

एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्त्यग्निं यमं मातरिश्वानमाहुः ॥ekaṃ sadviprā bahudhā vadantyagniṃ yamaṃ mātariśvānamāhuḥ ||

अर्थ

उसे इन्द्र, मित्र, वरुण, अग्नि और दिव्य सुपर्ण गरुत्मान कहते हैं। सत्य एक है; ज्ञानी उसे अनेक नामों से पुकारते हैं — अग्नि, यम, मातरिश्वा।

They call it Indra, Mitra, Varuna, Agni, and the heavenly bird Garutman. Truth is one; the wise speak of it in many ways, as Agni, Yama and Matarishvan.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

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पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

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