आज का श्लोक

आज का श्लोक रविवार, 30 अगस्त 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

कठोपनिषद् 1.3.3

आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव तु ।ātmānaṃ rathinaṃ viddhi śarīraṃ rathameva tu |

बुद्धिं तु सारथिं विद्धि मनः प्रग्रहमेव च ॥buddhiṃ tu sārathiṃ viddhi manaḥ pragrahameva ca ||

अर्थ

आत्मा को रथ का स्वामी जानो और शरीर को रथ; बुद्धि को सारथी जानो और मन को लगाम।

Know the self as the rider in a chariot and the body as the chariot; know the intellect as the charioteer and the mind as the reins.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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