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पंचांग, व्रत-त्योहारों के नियम, मुहूर्त, ज्योतिष और वास्तु की सरल व्याख्या — और यह भी कि यह साइट इनकी गणना कैसे करती है। जहाँ परम्पराओं में मतभेद है, वहाँ हम स्पष्ट बताते हैं।
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पंचांग
पंचांग के पाँच अंग, दिन के विभाग और चान्द्र-सौर कैलेंडर।
- पंचांग अयनांश: पंचांगों में कुछ मिनटों का अन्तर क्यों अयनांश सायन और निरयण राशिचक्र के बीच का अन्तर है, जो हर वर्ष लगभग 50.3 विकला बढ़ता है। अयनांश, सूर्योदय की परिभाषा, स्थान और परम्पराओं के अन्तर से दो पंचांगों में कुछ मिनटों का भेद आ सकता है।
- पंचांग अधिक मास और क्षय मास: चान्द्र पंचांग का ऋतुओं से तालमेल जब दो अमावस्याओं के बीच सूर्य राशि नहीं बदलता तब अधिक मास होता है; जब वह दो बार राशि बदलता है तब अत्यन्त दुर्लभ क्षय मास होता है। इन्हीं से चान्द्र मास ऋतुओं के साथ बने रहते हैं।
- पंचांग अमान्त और पूर्णिमान्त: चान्द्र मास गिनने की दो पद्धतियाँ अमान्त पद्धति में चान्द्र मास अमावस्या पर समाप्त होता है, पूर्णिमान्त में पूर्णिमा पर। दोनों में पर्व की तिथि एक ही रहती है; केवल कृष्ण पक्ष के मास का नाम बदलता है।
- पंचांग भद्रा (विष्टि करण): क्या है और क्यों देखी जाती है भद्रा पंचांग के अर्ध-तिथि खण्ड, करण, में से विष्टि करण का नाम है। यह एक चान्द्र मास में लगभग आठ बार आती है, और परम्परा चन्द्र राशि के अनुसार इसका वास तीन लोकों में से एक में मानती है।
- पंचांग पंचक: अर्थ, समय और पारम्परिक मान्यताएँ पंचक वह अवधि है जब चन्द्रमा निरयण कुम्भ और मीन राशि में रहता है, यानी धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती तक पाँच नक्षत्र। यह लगभग साढ़े चार दिन चलता है और लगभग हर चान्द्र मास में आता है।
- पंचांग ब्रह्म मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त: सरल व्याख्या ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले की रात्रि का 14वाँ मुहूर्त है और अभिजित दिन का 8वाँ मुहूर्त, जो स्थानीय मध्याह्न के आसपास पड़ता है। दोनों वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाले जाते हैं।
- पंचांग होरा: दिन-रात के 24 ग्रह-काल होरा हिन्दू दिन को 24 ग्रह-कालों में बाँटती है — 12 दिन में और 12 रात में — और हर होरा सात पारम्परिक ग्रहों में से किसी एक के अधीन होती है।
- पंचांग चौघड़िया: दिन और रात के आठ-आठ भाग चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है और हर भाग को अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग नाम देता है।
- पंचांग राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल की जानकारी राहु काल, यमगण्ड और गुलिक दिन के तीन दैनिक काल हैं — प्रत्येक दिनमान का आठवाँ भाग — जिनमें नया शुभ कार्य आरम्भ करना परम्परा में टाला जाता है।
- पंचांग योग और करण: पंचांग के चौथे और पाँचवें अंग योग सूर्य और चन्द्रमा के निरयण भोगांशों के योग से बनता है और करण तिथि का आधा भाग है। ये दोनों मिलकर पंचांग के पाँच अंग पूरे करते हैं।
- पंचांग नक्षत्र: 27 चान्द्र नक्षत्रों की जानकारी नक्षत्र निरयण राशिचक्र के 27 समान भाग हैं, प्रत्येक 13°20′ का। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें उस समय चन्द्रमा स्थित हो।
- पंचांग तिथि: चान्द्र दिवस की पूरी जानकारी तिथि वह समय है जिसमें चन्द्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। 30 तिथियाँ मिलकर एक चान्द्र मास बनाती हैं, जो शुक्ल और कृष्ण पक्ष में बँटा होता है।
- पंचांग पंचांग क्या है? हिन्दू काल-गणना के पाँच अंग पंचांग पारंपरिक हिन्दू काल-पत्र है, जो पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — पर आधारित है और किसी विशेष स्थान व दिन के लिए गणना किया जाता है।
त्योहार
तिथि, काल और संक्रान्ति के नियमों से त्योहारों की तिथि कैसे तय होती है।
- त्योहार नवरात्रि: चैत्र और शारदीय नवरात्रि दो प्रमुख नवरात्रियाँ, घटस्थापना का समय कैसे तय होता है, और नवरात्रि कभी आठ या दस दिन की क्यों होती है।
- त्योहार जन्माष्टमी: स्मार्त और वैष्णव तिथि का अंतर कृष्ण जन्माष्टमी प्रायः लगातार दो दिनों पर दिखाई देती है। यह लेख स्मार्त निशीथ नियम और वैष्णव रोहिणी व उदया अष्टमी परम्परा को समझाता है।
- त्योहार होलिका दहन और होली: मुहूर्त और भद्रा होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा को प्रदोष काल में, भद्रा से बचकर किया जाता है, और अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। जानिए समय कैसे तय होता है।
- त्योहार दीपावली की तिथि कैसे तय होती है दीपावली की लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में अमावस्या से तय होती है। जानिए अमावस्या दो संध्याओं में हो तो कौन-सा नियम लगता है और पंचांगों में अंतर क्यों होता है।
- त्योहार पितृ पक्ष और श्राद्ध: तिथियाँ और शुभ समय पितृ पक्ष पूर्वजों के स्मरण का पक्ष है। यह लेख बताता है कि हर श्राद्ध की तिथि कैसे तय होती है और दिन का कौन-सा समय श्रेष्ठ माना जाता है।
- त्योहार संक्रान्ति और मकर संक्रान्ति: सूर्य का निरयण राशि प्रवेश संक्रान्ति वह क्षण है जब सूर्य नई निरयण राशि में प्रवेश करता है; वर्ष में ऐसा बारह बार होता है। मकर संक्रान्ति, यानी मकर राशि में प्रवेश, आजकल लगभग 14–15 जनवरी को पड़ती है और देश भर में अनेक नामों से मनाई जाती है।
व्रत
एकादशी, प्रदोष, संकष्टी जैसे व्रत और उनके पालन के नियम।
- व्रत संकष्टी चतुर्थी: चन्द्रोदय और मासिक गणेश व्रत संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाने वाला मासिक गणेश व्रत है, जो चन्द्रोदय के बाद पूर्ण होता है। जानिए इसकी तिथि और चन्द्रोदय का समय कैसे निकलता है।
- व्रत प्रदोष व्रत: प्रदोष काल और तिथि-निर्णय प्रदोष व्रत में त्रयोदशी की संध्या को शिव पूजन होता है। जानिए प्रदोष काल क्या है, व्रत का दिन कैसे तय होता है और वार के अनुसार नाम।
- व्रत एकादशी व्रत: तिथि-निर्णय और पारण का समय एकादशी कभी-कभी दो तिथियों पर क्यों दिखती है, स्मार्त और वैष्णव नियम में क्या अंतर है, और द्वादशी पर पारण का समय कैसे निकाला जाता है।
मुहूर्त
महत्वपूर्ण कार्यों के आरम्भ के लिए पारम्परिक मुहूर्त-विचार में क्या देखा जाता है।
- मुहूर्त विवाह मुहूर्त: शुभ विवाह तिथि कैसे चुनी जाती है विवाह के ग्यारह नक्षत्र, विवाह के लिए पारम्परिक रूप से वर्जित काल, और पंचांगों की विवाह-तिथि सूचियाँ अलग क्यों होती हैं।
- मुहूर्त गृह प्रवेश मुहूर्त: कैसे चुना जाता है गृह प्रवेश मुहूर्त में पारम्परिक रूप से देखे जाने वाले नक्षत्र, तिथियाँ, मास, वार और वर्जित काल।
ज्योतिष
जन्म कुण्डली की अवधारणाएँ — दशा, मिलान और दोष — बिना भय के समझाई गईं।
- ज्योतिष मांगलिक दोष: एक संतुलित दृष्टि मांगलिक (मंगल) दोष का नियम, विभिन्न परम्पराओं के उत्तर अलग क्यों होते हैं, और इससे घबराने की आवश्यकता क्यों नहीं।
- ज्योतिष अष्टकूट गुण मिलान: 36 गुणों का मिलान गुण मिलान के आठ कूट क्या मिलाते हैं, 36 गुण कैसे बँटते हैं, और केवल अंक पर विवाह का निर्णय क्यों न लें।
- ज्योतिष विंशोत्तरी दशा: मूल बातें जन्म नक्षत्र से 120 वर्ष का विंशोत्तरी दशा चक्र कैसे बनता है, और महादशा व अन्तर्दशा का विभाजन कैसे होता है।
वास्तु
पारम्परिक स्थापत्य के दिशा-सिद्धान्त और उनकी व्यावहारिक सीमाएँ।