आज का श्लोक

आज का श्लोक शनिवार, 29 अगस्त 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 6.17

युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु ।yuktāhāravihārasya yuktaceṣṭasya karmasu |

युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा ॥yuktasvapnāvabodhasya yogo bhavati duḥkhahā ||

अर्थ

जो आहार-विहार में संयत है, कर्मों में संतुलित है और सोने-जागने में नियमित है, उसके लिए योग दुःखों का नाश करने वाला होता है।

For one who is moderate in food and recreation, balanced in work, and regular in sleep and waking, yoga removes sorrow.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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