आज का श्लोक शनिवार, 8 अगस्त 2026
भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।
श्रीमद्भगवद्गीता 9.34
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।manmanā bhava madbhakto madyājī māṃ namaskuru |
मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः ॥māmevaiṣyasi yuktvaivamātmānaṃ matparāyaṇaḥ ||
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अर्थ
मुझमें मन लगाओ, मेरे भक्त बनो, मेरा पूजन करो और मुझे नमस्कार करो; इस प्रकार मुझे लक्ष्य बनाकर तुम मुझे ही प्राप्त होगे।
Fix your mind on Me, be devoted to Me, worship Me and bow to Me; so disciplined, with Me as your goal, you will come to Me.
अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।
पिछले श्लोक
पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।
- 07/08/2026 (शुक्र) क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.63
- 06/08/2026 (गुरु) अष्टादशपुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम् । पारम्परिक सुभाषित
- 05/08/2026 (बुध) नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन । कठोपनिषद् 1.2.23
- 04/08/2026 (मंगल) बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः । श्रीमद्भगवद्गीता 6.6
- 03/08/2026 (सोम) श्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे । विष्णु सहस्रनाम (उत्तरभाग)
- 02/08/2026 (रवि) ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । ऋग्वेद 7.59.12
- 01/08/2026 (शनि) अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च । श्रीमद्भगवद्गीता 12.13
- 31/07/2026 (शुक्र) तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर । श्रीमद्भगवद्गीता 3.19
- 30/07/2026 (गुरु) अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् । गुरुगीता
- 29/07/2026 (बुध) भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः । मुण्डकोपनिषद् 2.2.8
- 28/07/2026 (मंगल) असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम् । श्रीमद्भगवद्गीता 6.35
- 27/07/2026 (सोम) न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.20
- 26/07/2026 (रवि) धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः । मनुस्मृति 8.15
- 25/07/2026 (शनि) अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत् । श्रीमद्भगवद्गीता 17.15
- 24/07/2026 (शुक्र) यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । श्रीमद्भगवद्गीता 4.7
- 23/07/2026 (गुरु) शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं पारम्परिक प्रार्थना
- 22/07/2026 (बुध) एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा । श्वेताश्वतरोपनिषद् 6.11
- 21/07/2026 (मंगल) अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् । श्रीमद्भगवद्गीता 8.5
- 20/07/2026 (सोम) नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते । श्रीमद्भगवद्गीता 2.40
- 19/07/2026 (रवि) न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि । पारम्परिक सुभाषित
- 18/07/2026 (शनि) ईशा वास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् । ईशावास्योपनिषद् 1
- 17/07/2026 (शुक्र) न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते । श्रीमद्भगवद्गीता 4.38
- 16/07/2026 (गुरु) कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात् । श्रीमद्भागवत पुराण 11.2.36
- 15/07/2026 (बुध) ॐ भूर्भुवः स्वः । ऋग्वेद 3.62.10
- 14/07/2026 (मंगल) समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः । श्रीमद्भगवद्गीता 9.29
- 13/07/2026 (सोम) ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते । श्रीमद्भगवद्गीता 2.62
- 12/07/2026 (रवि) आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः । नीतिशतक (भर्तृहरि के नाम से प्रचलित)
- 11/07/2026 (शनि) उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत । कठोपनिषद् 1.3.14
- 10/07/2026 (शुक्र) उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् । श्रीमद्भगवद्गीता 6.5
- 09/07/2026 (गुरु) मनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे । निर्वाणषट्कम् (आदि शंकराचार्य) 1