आज का श्लोक

आज का श्लोक मंगलवार, 25 अगस्त 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 3.21

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः ।yadyadācarati śreṣṭhastattadevetaro janaḥ |

स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥sa yatpramāṇaṃ kurute lokastadanuvartate ||

अर्थ

श्रेष्ठ व्यक्ति जैसा आचरण करता है, दूसरे लोग भी वैसा ही करते हैं; वह जो मानदण्ड स्थापित करता है, संसार उसी का अनुसरण करता है।

Whatever a leading person does, others follow; whatever standard such a person sets, the world adopts.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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