आज का श्लोक

आज का श्लोक शनिवार, 22 अगस्त 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 6.40

पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते ।pārtha naiveha nāmutra vināśastasya vidyate |

न हि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति ॥na hi kalyāṇakṛtkaściddurgatiṃ tāta gacchati ||

अर्थ

ऐसे साधक का न इस लोक में नाश होता है, न परलोक में; कल्याण का कार्य करने वाला कभी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता।

Neither in this world nor the next is such a seeker ever lost; one who does good never comes to a bad end.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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