आज का श्लोक

आज का श्लोक गुरुवार, 13 अगस्त 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

पारम्परिक सुभाषित

परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः ।paropakārāya phalanti vṛkṣāḥ paropakārāya vahanti nadyaḥ |

परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थमिदं शरीरम् ॥paropakārāya duhanti gāvaḥ paropakārārthamidaṃ śarīram ||

अर्थ

वृक्ष दूसरों के लिए फल देते हैं, नदियाँ दूसरों के लिए बहती हैं, गायें दूसरों के लिए दूध देती हैं; यह शरीर भी परोपकार के लिए ही है।

Trees bear fruit for others, rivers flow for others, cows give milk for others; this body too is meant for the good of others.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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