यात्रा मुहूर्त शनिवार, 3 अक्टूबर 2026
आज का दिशा शूल (त्याज्य दिशा), उसका पारम्परिक परिहार, और चौघड़िया, होरा व राहु काल से यात्रा आरम्भ के अच्छे समय।
यात्रा आरम्भ के अच्छे समय
| समय | चौघड़िया | इस समय में होरा |
|---|---|---|
| – दिन |
शुभ |
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| – दिन |
चर |
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| – दिन |
लाभ |
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| – दिन |
अमृत |
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| – रात्रि |
लाभ |
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| – रात्रि |
शुभ |
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| – रात्रि |
अमृत |
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| – रात्रि |
चर |
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| – रात्रि |
लाभ |
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हिन्दू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक; आधी रात के बाद के समय पर (+1) लिखा है।
वार अनुसार दिशा शूल
| वार | दिशा शूल | परिहार (यदि यात्रा टल न सके) |
|---|---|---|
| रविवार | पश्चिम | घी |
| सोमवार | पूर्व | दूध |
| मंगलवार | उत्तर | गुड़ |
| बुधवार | उत्तर | तिल |
| गुरुवार | दक्षिण | दही |
| शुक्रवार | पश्चिम | जौ |
| शनिवार | पूर्व | उड़द |
वार सूर्योदय से सूर्योदय तक माना जाता है, इसलिए सूर्योदय से पहले पिछले वार का दिशा शूल लागू होता है।
प्रयुक्त नियम
- दिन और रात के अमृत, शुभ व लाभ (शुभ चौघड़िया) तथा चर (चल) चौघड़िया लें — चर चौघड़िया परम्परा से यात्रा के लिए उत्तम माना जाता है।
- जो भाग राहु काल में पड़े उसे हटा दें।
- शेष समय में जिन घंटों का होरा स्वामी नैसर्गिक शुभ ग्रह (चन्द्र, बुध, गुरु या शुक्र) हो, उन्हें श्रेष्ठ चिह्नित करें।
- यदि यात्रा उस दिन की दिशा शूल वाली दिशा में है तो यात्रा आरम्भ न करें या परिहार करें।
दिशा शूल सारणी: घाघ-भड्डरी की कहावत — सोम व शनिवार पूर्व, मंगल व बुधवार उत्तर, रवि व शुक्रवार पश्चिम, गुरुवार दक्षिण। परिहार पंचांगों में सामान्यतः दी गई सूची के अनुसार: रविवार घी, सोमवार दूध, मंगलवार गुड़, बुधवार तिल, गुरुवार दही, शुक्रवार जौ, शनिवार उड़द।
भिन्नताएँ: कुछ पंचांग हर वार के लिए एक विदिशा (कोण दिशा) या नक्षत्र शूल (जैसे ज्येष्ठा पूर्व, रोहिणी पश्चिम, पूर्वा भाद्रपद दक्षिण) भी देते हैं; परिहार की सूचियाँ भी भिन्न हैं (जैसे रविवार दलिया, सोमवार दर्पण में मुख देखना, बुधवार धनिया, शनिवार अदरक)। ये यहाँ लागू नहीं किए गए हैं।
परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।