आज का श्लोक

आज का श्लोक बुधवार, 5 अगस्त 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

कठोपनिषद् 1.2.23

नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन ।nāyamātmā pravacanena labhyo na medhayā na bahunā śrutena |

यमेवैष वृणुते तेन लभ्यस्तस्यैष आत्मा विवृणुते तनूं स्वाम् ॥yamevaiṣa vṛṇute tena labhyastasyaiṣa ātmā vivṛṇute tanūṃ svām ||

अर्थ

यह आत्मा न प्रवचन से मिलती है, न बुद्धि से, न बहुत सुनने से। जिसे यह स्वयं चुनती है उसी को मिलती है; उसके सामने यह अपना स्वरूप प्रकट करती है।

The self is not attained by discourses, nor by intellect, nor by much learning. It is attained by the one it chooses; to that one the self reveals its own nature.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

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