आज का श्लोक

आज का श्लोक मंगलवार, 18 अगस्त 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 4.8

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।paritrāṇāya sādhūnāṃ vināśāya ca duṣkṛtām |

धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥dharmasaṃsthāpanārthāya sambhavāmi yuge yuge ||

अर्थ

सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में प्रकट होता हूँ।

To protect the good, to end the wicked and to establish righteousness, I appear age after age.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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