आज का श्लोक

आज का श्लोक शुक्रवार, 28 अगस्त 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

रामरक्षास्तोत्र (बुधकौशिक) 33

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।manojavaṃ mārutatulyavegaṃ jitendriyaṃ buddhimatāṃ variṣṭham |

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥vātātmajaṃ vānarayūthamukhyaṃ śrīrāmadūtaṃ śaraṇaṃ prapadye ||

अर्थ

जो मन के समान गतिशील, वायु के समान वेगवान, जितेन्द्रिय, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवनपुत्र, वानरसेना के प्रमुख और श्रीराम के दूत हैं, मैं उन हनुमान जी की शरण लेता हूँ।

I take refuge in Hanuman, swift as the mind, fast as the wind, master of the senses, foremost of the wise, son of the Wind, chief of the monkey host, messenger of Shri Rama.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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