आज का श्लोक

आज का श्लोक मंगलवार, 8 सितंबर 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 2.48

योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय ।yogasthaḥ kuru karmāṇi saṅgaṃ tyaktvā dhanañjaya |

सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥siddhyasiddhyoḥ samo bhūtvā samatvaṃ yoga ucyate ||

अर्थ

योग में स्थित होकर, आसक्ति छोड़कर कर्म करो; सफलता और असफलता में समान रहो। यही समभाव योग कहलाता है।

Established in yoga, do your work without attachment, even-minded in success and failure. This evenness of mind is called yoga.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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