आज का श्लोक

आज का श्लोक सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

भज गोविन्दम् (आदि शंकराचार्य) 21

पुनरपि जननं पुनरपि मरणं पुनरपि जननीजठरे शयनम् ।punarapi jananaṃ punarapi maraṇaṃ punarapi jananījaṭhare śayanam |

इह संसारे बहुदुस्तारे कृपयाऽपारे पाहि मुरारे ॥iha saṃsāre bahudustāre kṛpayā'pāre pāhi murāre ||

अर्थ

बार-बार जन्म, बार-बार मृत्यु, बार-बार माता के गर्भ में शयन — यह संसार पार करना बहुत कठिन है। हे मुरारि, अपनी असीम कृपा से मेरी रक्षा करो।

Born again, dying again, lying again in a mother’s womb: this world is hard to cross. Save me by your boundless grace, O Murari.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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