आज का श्लोक

आज का श्लोक मंगलवार, 27 जनवरी 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 6.26

यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम् ।yato yato niścarati manaścañcalamasthiram |

ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत् ॥tatastato niyamyaitadātmanyeva vaśaṃ nayet ||

अर्थ

चंचल और अस्थिर मन जहाँ-जहाँ भटके, वहाँ-वहाँ से उसे रोककर बार-बार आत्मा में ही लगाना चाहिए।

Wherever the restless, unsteady mind wanders, draw it back from there and bring it under the control of the self.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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