आज का श्लोक गुरुवार, 8 जनवरी 2026
भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।
भज गोविन्दम् (आदि शंकराचार्य) 1
भज गोविन्दं भज गोविन्दं गोविन्दं भज मूढमते ।bhaja govindaṃ bhaja govindaṃ govindaṃ bhaja mūḍhamate |
सम्प्राप्ते सन्निहिते काले न हि न हि रक्षति डुकृञ्करणे ॥samprāpte sannihite kāle na hi na hi rakṣati ḍukṛñkaraṇe ||
सुनें और अभ्यास करें
कृत्रिम (मशीनी) आवाज़ — उच्चारण में त्रुटि हो सकती है; रिकॉर्डिंग को प्राथमिकता दें।
कुंजियाँ (जब प्लेयर पर फ़ोकस हो): ← और → पिछली या अगली पंक्ति, स्पेस चलाएँ या रोकें।
यहाँ उच्चारण ऑडियो उपलब्ध नहीं है: इस पाठ की रिकॉर्डिंग अभी नहीं है और इस ब्राउज़र में संस्कृत या हिन्दी की आवाज़ नहीं है।
अर्थ
हे मूढ़ मन, गोविन्द को भजो, गोविन्द को भजो। जब अन्त समय निकट आएगा, तब व्याकरण के नियम तुम्हारी रक्षा नहीं करेंगे।
Worship Govinda, worship Govinda, worship Govinda, O foolish mind! When the appointed hour of death draws near, rules of grammar will not save you.
अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।
पिछले श्लोक
पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।
- 07/01/2026 (बुध) सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम् । ऋग्वेद 10.191.2
- 06/01/2026 (मंगल) अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः । श्रीमद्भगवद्गीता 10.20
- 05/01/2026 (सोम) आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् । श्रीमद्भगवद्गीता 2.70
- 04/01/2026 (रवि) क्षणशः कणशश्चैव विद्यामर्थं च साधयेत् । पारम्परिक सुभाषित
- 03/01/2026 (शनि) श्रेयश्च प्रेयश्च मनुष्यमेतस्तौ सम्परीत्य विविनक्ति धीरः । कठोपनिषद् 1.2.2
- 02/01/2026 (शुक्र) यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता । श्रीमद्भगवद्गीता 6.19
- 01/01/2026 (गुरु) अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे । श्रीमद्भगवद्गीता 2.11