आज का श्लोक

आज का श्लोक सोमवार, 19 जनवरी 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 2.27

जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च ।jātasya hi dhruvo mṛtyurdhruvaṃ janma mṛtasya ca |

तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि ॥tasmādaparihārye'rthe na tvaṃ śocitumarhasi ||

अर्थ

जो जन्मा है उसकी मृत्यु निश्चित है और जो मरा है उसका जन्म निश्चित है। इसलिए जो टल नहीं सकता, उसके लिए शोक करना उचित नहीं।

Death is certain for whatever is born, and birth for whatever dies. So you should not grieve over what cannot be avoided.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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