आज का श्लोक

आज का श्लोक शनिवार, 24 जनवरी 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 15.15

सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च ।sarvasya cāhaṃ hṛdi sanniviṣṭo mattaḥ smṛtirjñānamapohanaṃ ca |

वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यो वेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम् ॥vedaiśca sarvairahameva vedyo vedāntakṛdvedavideva cāham ||

अर्थ

मैं सबके हृदय में स्थित हूँ; मुझसे ही स्मृति, ज्ञान और उनका लोप होता है। सब वेदों द्वारा जानने योग्य मैं ही हूँ, वेदान्त का कर्ता और वेदों का ज्ञाता भी मैं ही हूँ।

I dwell in the hearts of all; from Me come memory, knowledge and their loss. I am what all the Vedas seek to know, the author of Vedanta and the knower of the Vedas.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

व्हाट्सऐप