आज का श्लोक

आज का श्लोक मंगलवार, 20 जनवरी 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 7.7

मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय ।mattaḥ parataraṃ nānyatkiñcidasti dhanañjaya |

मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव ॥mayi sarvamidaṃ protaṃ sūtre maṇigaṇā iva ||

अर्थ

मुझसे परे कुछ भी नहीं है; यह सारा जगत मुझमें वैसे ही पिरोया है जैसे धागे में मणियाँ।

There is nothing higher than Me; all this is strung on Me like pearls on a thread.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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