आज का श्लोक

आज का श्लोक शनिवार, 31 जनवरी 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 10.41

यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा ।yadyadvibhūtimatsattvaṃ śrīmadūrjitameva vā |

तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंऽशसम्भवम् ॥tattadevāvagaccha tvaṃ mama tejoṃ'śasambhavam ||

अर्थ

जो कुछ भी ऐश्वर्ययुक्त, शोभायुक्त या शक्तिशाली है, उसे मेरे तेज के अंश से उत्पन्न जानो।

Whatever is glorious, beautiful or mighty, know that it springs from a spark of My splendour.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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