आज का श्लोक शनिवार, 3 जनवरी 2026
भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।
कठोपनिषद् 1.2.2
श्रेयश्च प्रेयश्च मनुष्यमेतस्तौ सम्परीत्य विविनक्ति धीरः ।śreyaśca preyaśca manuṣyametastau samparītya vivinakti dhīraḥ |
श्रेयो हि धीरोऽभि प्रेयसो वृणीते प्रेयो मन्दो योगक्षेमाद्वृणीते ॥śreyo hi dhīro'bhi preyaso vṛṇīte preyo mando yogakṣemādvṛṇīte ||
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अर्थ
श्रेय (कल्याण) और प्रेय (प्रिय) दोनों मनुष्य के सामने आते हैं। धीर पुरुष विचार कर प्रेय की अपेक्षा श्रेय को चुनता है; मन्दबुद्धि लाभ और संग्रह के लिए प्रेय को चुनता है।
The good and the pleasant both come to a person. The wise examine them and choose the good over the pleasant; the foolish choose the pleasant for the sake of getting and keeping.
अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।
पिछले श्लोक
पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।