आज का श्लोक सोमवार, 5 जनवरी 2026
भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।
श्रीमद्भगवद्गीता 2.70
आपूर्यमाणमचलप्रतिष्ठं समुद्रमापः प्रविशन्ति यद्वत् ।āpūryamāṇamacalapratiṣṭhaṃ samudramāpaḥ praviśanti yadvat |
तद्वत्कामा यं प्रविशन्ति सर्वे स शान्तिमाप्नोति न कामकामी ॥tadvatkāmā yaṃ praviśanti sarve sa śāntimāpnoti na kāmakāmī ||
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अर्थ
जैसे नदियाँ भरते रहने पर भी अचल रहने वाले समुद्र में समा जाती हैं, वैसे ही जिसमें सब कामनाएँ बिना विकार के समा जाती हैं वही शान्ति पाता है, कामनाओं के पीछे भागने वाला नहीं।
As rivers flow into the ocean, which is ever being filled yet stays within its bounds, so desires enter the sage without disturbing him; he finds peace, not the one who chases desires.
अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।
पिछले श्लोक
पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।
- 04/01/2026 (रवि) क्षणशः कणशश्चैव विद्यामर्थं च साधयेत् । पारम्परिक सुभाषित
- 03/01/2026 (शनि) श्रेयश्च प्रेयश्च मनुष्यमेतस्तौ सम्परीत्य विविनक्ति धीरः । कठोपनिषद् 1.2.2
- 02/01/2026 (शुक्र) यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता । श्रीमद्भगवद्गीता 6.19
- 01/01/2026 (गुरु) अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे । श्रीमद्भगवद्गीता 2.11