आज का श्लोक

आज का श्लोक शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 4.38

न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते ।na hi jñānena sadṛśaṃ pavitramiha vidyate |

तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति ॥tatsvayaṃ yogasaṃsiddhaḥ kālenātmani vindati ||

अर्थ

इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र करने वाला कुछ नहीं है। योग में सिद्ध व्यक्ति समय आने पर उसे अपने भीतर ही पा लेता है।

Nothing in this world purifies like knowledge. One perfected in yoga finds it within oneself in due time.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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