जय गणेश देवा Jai Ganesh Deva
भगवान गणेश की आरती।
- देवता श्री गणेश
- प्रकार आरती
- भाषा हिन्दी
- परम्परा अनेक परम्पराओं में प्रचलित
- स्रोत पारम्परिक भक्ति पाठ (प्रचलित मुद्रित एवं मौखिक रूप) — Traditional aarti
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टेक
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।jay gaṇeś jay gaṇeś jay gaṇeś devā |
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥mātā jākī pārvatī pitā mahādevā ||
एक दन्त दयावन्त, चार भुजा धारी ।ek danta dayāvanta, cār bhujā dhārī |
माथे सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी ॥māthe sindūr sohe, mūse kī savārī ||
पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा ।pān caṛhe phūl caṛhe, aur caṛhe mevā |
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा ॥laḍḍuan kā bhog lage, santa kareṃ sevā ||
अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया ।andhan ko ām̐kh det, koṛhin ko kāyā |
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥bām̐jhan ko putra det, nirdhan ko māyā ||
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।sūr śyām śaraṇ āe, saphal kīje sevā |
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥mātā jākī pārvatī pitā mahādevā ||
रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।
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प्रश्न
जय गणेश देवा क्या है?
भगवान गणेश की आरती।
जय गणेश देवा किस देवता से जुड़ा है?
जय गणेश देवा श्री गणेश से जुड़ा है। विघ्नहर्ता और शुभारम्भ के देवता, जिनकी पूजा लगभग हर हिन्दू अनुष्ठान में सबसे पहले होती है।
जय गणेश देवा का अर्थ क्या है?
हर पूजा में गणेश जी का पूजन सबसे पहले होता है, और प्रायः यही आरती सबसे पहले गाई जाती है। इसमें उन्हें माता पार्वती और महादेव का पुत्र, एकदन्त, चार भुजाओं वाला, मस्तक पर सिन्दूर धारण करने वाला और मूषक पर सवार बताया गया है। भक्त पान, फूल, मेवा और लड्डुओं का भोग लगाते हैं। आरती उनकी दयालुता का वर्णन करती है — अन्धों को आँख, रोगी को स्वस्थ काया, निःसन्तान को सन्तान और निर्धन को धन देने वाले — और अन्त में कवि शरण में आकर सेवा सफल करने की प्रार्थना करता है।
जय गणेश देवा का स्रोत क्या है?
पारम्परिक भक्ति पाठ (प्रचलित मुद्रित एवं मौखिक रूप) — Traditional aarti. परम्परा: अनेक परम्पराओं में प्रचलित।
क्या जय गणेश देवा के अलग-अलग संस्करण हैं?
दूसरा पद “माथे पर तिलक सोहे” के रूप में भी गाया जाता है। कई घरों में कुछ और पद भी जोड़े जाते हैं, जो यहाँ नहीं दिए गए हैं।