आज का श्लोक रविवार, 28 जून 2026
भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।
पारम्परिक प्रार्थना
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलसारभक्षणम् ।gajānanaṃ bhūtagaṇādisevitaṃ kapitthajambūphalasārabhakṣaṇam |
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ॥umāsutaṃ śokavināśakārakaṃ namāmi vighneśvarapādapaṅkajam ||
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अर्थ
जिनका मुख हाथी का है, भूतगण जिनकी सेवा करते हैं, जो कैथ और जामुन के फल का रस ग्रहण करते हैं, उन उमापुत्र, शोकनाशक विघ्नेश्वर के चरणकमलों को मैं नमस्कार करता हूँ।
I bow at the lotus feet of the elephant-faced Lord of obstacles, served by the ganas, who enjoys wood-apple and jambu fruit, the son of Uma who destroys sorrow.
अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।
पिछले श्लोक
पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।
- 27/06/2026 (शनि) ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । तैत्तिरीयोपनिषद् 2.1 (Shanti Patha)
- 26/06/2026 (शुक्र) बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते । श्रीमद्भगवद्गीता 7.19
- 25/06/2026 (गुरु) सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ । श्रीमद्भगवद्गीता 2.38
- 24/06/2026 (बुध) प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः । चाणक्य नीति 16.17
- 23/06/2026 (मंगल) यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः । श्रीमद्भगवद्गीता 18.78
- 22/06/2026 (सोम) अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः । श्रीमद्भगवद्गीता 4.36
- 21/06/2026 (रवि) कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् । पारम्परिक प्रार्थना
- 20/06/2026 (शनि) अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् । महोपनिषद् (हितोपदेश 1.71 में भी) 6.71
- 19/06/2026 (शुक्र) यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत् । श्रीमद्भगवद्गीता 9.27
- 18/06/2026 (गुरु) दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.56
- 17/06/2026 (बुध) चन्दनं शीतलं लोके चन्दनादपि चन्द्रमाः । पारम्परिक सुभाषित
- 16/06/2026 (मंगल) असतो मा सद्गमय । बृहदारण्यकोपनिषद् 1.3.28
- 15/06/2026 (सोम) भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् । श्रीमद्भगवद्गीता 5.29
- 14/06/2026 (रवि) पुनरपि जननं पुनरपि मरणं पुनरपि जननीजठरे शयनम् । भज गोविन्दम् (आदि शंकराचार्य) 21
- 13/06/2026 (शनि) समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः । ऋग्वेद 10.191.4
- 12/06/2026 (शुक्र) यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा । श्रीमद्भगवद्गीता 10.41
- 11/06/2026 (गुरु) विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.71
- 10/06/2026 (बुध) सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । पारम्परिक प्रार्थना
- 09/06/2026 (मंगल) सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः । मुण्डकोपनिषद् 3.1.6
- 08/06/2026 (सोम) यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम् । श्रीमद्भगवद्गीता 6.26
- 07/06/2026 (रवि) देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा । श्रीमद्भगवद्गीता 2.13
- 06/06/2026 (शनि) सत्यं ब्रूयात्प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात्सत्यमप्रियम् । मनुस्मृति 4.138
- 05/06/2026 (शुक्र) सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च । श्रीमद्भगवद्गीता 15.15
- 04/06/2026 (गुरु) श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् । श्रीमद्भगवद्गीता 3.35
- 03/06/2026 (बुध) वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ । पारम्परिक प्रार्थना
- 02/06/2026 (मंगल) यतो वाचो निवर्तन्ते अप्राप्य मनसा सह । तैत्तिरीयोपनिषद् 2.9.1
- 01/06/2026 (सोम) मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय । श्रीमद्भगवद्गीता 7.7
- 31/05/2026 (रवि) जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च । श्रीमद्भगवद्गीता 2.27
- 30/05/2026 (शनि) विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च । चाणक्य नीति 5.15
- 29/05/2026 (शुक्र) सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज । श्रीमद्भगवद्गीता 18.66