आज का श्लोक

आज का श्लोक गुरुवार, 4 जून 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 3.35

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् ।śreyānsvadharmo viguṇaḥ paradharmātsvanuṣṭhitāt |

स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः ॥svadharme nidhanaṃ śreyaḥ paradharmo bhayāvahaḥ ||

अर्थ

दूसरे के धर्म को भली-भाँति निभाने से अपना धर्म, गुणरहित होने पर भी, श्रेष्ठ है। अपने धर्म में मरना भी कल्याणकारी है; पराया धर्म भय देने वाला है।

Better one’s own duty, even imperfectly done, than another’s duty done well. Better to die in one’s own duty; another’s duty is full of danger.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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