आज का श्लोक

आज का श्लोक बुधवार, 3 जून 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

पारम्परिक प्रार्थना

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ ।vakratuṇḍa mahākāya sūryakoṭisamaprabha |

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥nirvighnaṃ kuru me deva sarvakāryeṣu sarvadā ||

अर्थ

हे वक्रतुण्ड, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव, मेरे सभी कार्यों को सदा विघ्नरहित कीजिए।

O Lord with the curved trunk and mighty body, radiant as a million suns, make all my undertakings free of obstacles, always.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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