आज का श्लोक

आज का श्लोक गुरुवार, 28 मई 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 4.34

तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया ।tadviddhi praṇipātena paripraśnena sevayā |

उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥upadekṣyanti te jñānaṃ jñāninastattvadarśinaḥ ||

अर्थ

इस ज्ञान को विनम्र प्रणाम, जिज्ञासापूर्ण प्रश्न और सेवा से जानो; तत्त्व को जानने वाले ज्ञानी तुम्हें उपदेश देंगे।

Learn this by humble approach, by sincere questioning and by service; the wise who have seen the truth will teach you.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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