आज का श्लोक

आज का श्लोक गुरुवार, 16 जुलाई 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भागवत पुराण 11.2.36

कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात् ।kāyena vācā manasendriyairvā buddhyātmanā vā prakṛteḥ svabhāvāt |

करोति यद्यत् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयेत्तत् ॥karoti yadyat sakalaṃ parasmai nārāyaṇāyeti samarpayettat ||

अर्थ

शरीर, वाणी, मन, इन्द्रियों, बुद्धि या अपने स्वभाववश जो कुछ भी करें, वह सब “नारायण को समर्पित” कहकर परमात्मा को अर्पित कर दें।

Whatever one does with body, speech, mind or senses, with intellect or self, or by the force of one’s nature, let one offer it all to the Supreme, saying “to Narayana”.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

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