आज का श्लोक रविवार, 5 जुलाई 2026
भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।
गुरुगीता
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।gururbrahmā gururviṣṇuḥ gururdevo maheśvaraḥ |
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥guruḥ sākṣāt paraṃ brahma tasmai śrīgurave namaḥ ||
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अर्थ
गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही महेश्वर हैं; गुरु साक्षात परब्रह्म हैं। उन श्रीगुरु को नमस्कार है।
The guru is Brahma, the guru is Vishnu, the guru is the god Maheshvara; the guru is the supreme Brahman itself. Salutations to that revered guru.
अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।
पिछले श्लोक
पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।
- 04/07/2026 (शनि) द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया समानं वृक्षं परिषस्वजाते । मुण्डकोपनिषद् 3.1.1
- 03/07/2026 (शुक्र) यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति । श्रीमद्भगवद्गीता 6.30
- 02/07/2026 (गुरु) मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.14
- 01/07/2026 (बुध) यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः । मनुस्मृति 3.56
- 30/06/2026 (मंगल) त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः । श्रीमद्भगवद्गीता 16.21
- 29/06/2026 (सोम) काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः । श्रीमद्भगवद्गीता 3.37
- 28/06/2026 (रवि) गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलसारभक्षणम् । पारम्परिक प्रार्थना
- 27/06/2026 (शनि) ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । तैत्तिरीयोपनिषद् 2.1 (Shanti Patha)
- 26/06/2026 (शुक्र) बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते । श्रीमद्भगवद्गीता 7.19
- 25/06/2026 (गुरु) सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ । श्रीमद्भगवद्गीता 2.38
- 24/06/2026 (बुध) प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः । चाणक्य नीति 16.17
- 23/06/2026 (मंगल) यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः । श्रीमद्भगवद्गीता 18.78
- 22/06/2026 (सोम) अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः । श्रीमद्भगवद्गीता 4.36
- 21/06/2026 (रवि) कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् । पारम्परिक प्रार्थना
- 20/06/2026 (शनि) अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् । महोपनिषद् (हितोपदेश 1.71 में भी) 6.71
- 19/06/2026 (शुक्र) यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत् । श्रीमद्भगवद्गीता 9.27
- 18/06/2026 (गुरु) दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.56
- 17/06/2026 (बुध) चन्दनं शीतलं लोके चन्दनादपि चन्द्रमाः । पारम्परिक सुभाषित
- 16/06/2026 (मंगल) असतो मा सद्गमय । बृहदारण्यकोपनिषद् 1.3.28
- 15/06/2026 (सोम) भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् । श्रीमद्भगवद्गीता 5.29
- 14/06/2026 (रवि) पुनरपि जननं पुनरपि मरणं पुनरपि जननीजठरे शयनम् । भज गोविन्दम् (आदि शंकराचार्य) 21
- 13/06/2026 (शनि) समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः । ऋग्वेद 10.191.4
- 12/06/2026 (शुक्र) यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा । श्रीमद्भगवद्गीता 10.41
- 11/06/2026 (गुरु) विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.71
- 10/06/2026 (बुध) सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । पारम्परिक प्रार्थना
- 09/06/2026 (मंगल) सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः । मुण्डकोपनिषद् 3.1.6
- 08/06/2026 (सोम) यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम् । श्रीमद्भगवद्गीता 6.26
- 07/06/2026 (रवि) देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा । श्रीमद्भगवद्गीता 2.13
- 06/06/2026 (शनि) सत्यं ब्रूयात्प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात्सत्यमप्रियम् । मनुस्मृति 4.138
- 05/06/2026 (शुक्र) सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च । श्रीमद्भगवद्गीता 15.15