आज का श्लोक

आज का श्लोक शुक्रवार, 8 मई 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

तैत्तिरीयोपनिषद् 1.11.2

मातृदेवो भव ।mātṛdevo bhava |

पितृदेवो भव ।pitṛdevo bhava |

आचार्यदेवो भव ।ācāryadevo bhava |

अतिथिदेवो भव ॥atithidevo bhava ||

अर्थ

माता को देवता मानो, पिता को देवता मानो, आचार्य को देवता मानो, अतिथि को देवता मानो।

Treat your mother as divine, your father as divine, your teacher as divine, your guest as divine.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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