आज का श्लोक

आज का श्लोक बुधवार, 8 अप्रैल 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

श्रीमद्भगवद्गीता 4.8

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।paritrāṇāya sādhūnāṃ vināśāya ca duṣkṛtām |

धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥dharmasaṃsthāpanārthāya sambhavāmi yuge yuge ||

अर्थ

सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में प्रकट होता हूँ।

To protect the good, to end the wicked and to establish righteousness, I appear age after age.

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

आरती और मन्त्र · व्रत कथाएँ

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