आज का श्लोक

आज का श्लोक शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।

वाल्मीकि रामायण, अरण्यकाण्ड 37.2

सुलभाः पुरुषा राजन्सततं प्रियवादिनः ।sulabhāḥ puruṣā rājansatataṃ priyavādinaḥ |

अप्रियस्य च पथ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभः ॥apriyasya ca pathyasya vaktā śrotā ca durlabhaḥ ||

अर्थ

हे राजन, सदा प्रिय बोलने वाले लोग सहज मिल जाते हैं, पर अप्रिय किन्तु हितकारी बात कहने वाला और उसे सुनने वाला दोनों दुर्लभ हैं। (मारीच का रावण से कथन।)

Those who always say pleasing things are easy to find, O king; but one who speaks an unpleasant yet wholesome truth, and one who listens to it, are rare. (Maricha to Ravana.)

अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।

पिछले श्लोक

पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।

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