आज का श्लोक शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026
भगवद्गीता, उपनिषद, वेद, सुभाषित और प्रसिद्ध स्तोत्रों से प्रतिदिन एक संस्कृत श्लोक, लिप्यन्तरण और अर्थ सहित। कुल 132 श्लोक क्रम से।
वाल्मीकि रामायण, अरण्यकाण्ड 37.2
सुलभाः पुरुषा राजन्सततं प्रियवादिनः ।sulabhāḥ puruṣā rājansatataṃ priyavādinaḥ |
अप्रियस्य च पथ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभः ॥apriyasya ca pathyasya vaktā śrotā ca durlabhaḥ ||
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अर्थ
हे राजन, सदा प्रिय बोलने वाले लोग सहज मिल जाते हैं, पर अप्रिय किन्तु हितकारी बात कहने वाला और उसे सुनने वाला दोनों दुर्लभ हैं। (मारीच का रावण से कथन।)
Those who always say pleasing things are easy to find, O king; but one who speaks an unpleasant yet wholesome truth, and one who listens to it, are rare. (Maricha to Ravana.)
अर्थ हमारा अपना संक्षिप्त भावार्थ है, शब्दशः अनुवाद नहीं।
पिछले श्लोक
पिछले दिनों में से हर दिन का श्लोक।
- 09/04/2026 (गुरु) दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे । श्रीमद्भगवद्गीता 17.20
- 08/04/2026 (बुध) परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । श्रीमद्भगवद्गीता 4.8
- 07/04/2026 (मंगल) या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता पारम्परिक प्रार्थना
- 06/04/2026 (सोम) सर्वं ह्येतद् ब्रह्मायमात्मा ब्रह्म सोऽयमात्मा चतुष्पात् ॥ माण्डूक्योपनिषद् 2
- 05/04/2026 (रवि) तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च । श्रीमद्भगवद्गीता 8.7
- 04/04/2026 (शनि) कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन । श्रीमद्भगवद्गीता 2.47
- 03/04/2026 (शुक्र) परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः । पारम्परिक सुभाषित
- 02/04/2026 (गुरु) कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः । ईशावास्योपनिषद् 2
- 01/04/2026 (बुध) श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः । श्रीमद्भगवद्गीता 4.39
- 31/03/2026 (मंगल) मङ्गलं भगवान् विष्णुः मङ्गलं गरुडध्वजः । पारम्परिक प्रार्थना
- 30/03/2026 (सोम) आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः । ऋग्वेद 1.89.1
- 29/03/2026 (रवि) मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु । श्रीमद्भगवद्गीता 9.34
- 28/03/2026 (शनि) क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.63
- 27/03/2026 (शुक्र) अष्टादशपुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम् । पारम्परिक सुभाषित
- 26/03/2026 (गुरु) नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन । कठोपनिषद् 1.2.23
- 25/03/2026 (बुध) बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः । श्रीमद्भगवद्गीता 6.6
- 24/03/2026 (मंगल) श्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे । विष्णु सहस्रनाम (उत्तरभाग)
- 23/03/2026 (सोम) ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । ऋग्वेद 7.59.12
- 22/03/2026 (रवि) अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च । श्रीमद्भगवद्गीता 12.13
- 21/03/2026 (शनि) तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर । श्रीमद्भगवद्गीता 3.19
- 20/03/2026 (शुक्र) अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् । गुरुगीता
- 19/03/2026 (गुरु) भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः । मुण्डकोपनिषद् 2.2.8
- 18/03/2026 (बुध) असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम् । श्रीमद्भगवद्गीता 6.35
- 17/03/2026 (मंगल) न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः । श्रीमद्भगवद्गीता 2.20
- 16/03/2026 (सोम) धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः । मनुस्मृति 8.15
- 15/03/2026 (रवि) अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत् । श्रीमद्भगवद्गीता 17.15
- 14/03/2026 (शनि) यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । श्रीमद्भगवद्गीता 4.7
- 13/03/2026 (शुक्र) शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं पारम्परिक प्रार्थना
- 12/03/2026 (गुरु) एको देवः सर्वभूतेषु गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा । श्वेताश्वतरोपनिषद् 6.11
- 11/03/2026 (बुध) अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् । श्रीमद्भगवद्गीता 8.5