माणिक्य (माणिक) — सूर्य का रत्न
सूर्य का पारम्परिक रत्न माणिक्य (माणिक): उपरत्न, धातु, उँगली और वार, आवश्यक सावधानियाँ, और आपके स्थान पर इसे पहली बार धारण करने का पारम्परिक समय।
कोई भी रत्न पहनने से पहले अवश्य पढ़ें
- ग्रह के लिए रत्न धारण करना एक पारम्परिक प्रथा है। इससे किसी फल का वादा नहीं किया जाता, और इसका प्रभाव वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं है।
- रत्न अपने ग्रह को कुण्डली में उसकी हर भूमिका में बल देता है। योग्य ज्योतिषी द्वारा पूरी कुण्डली की जाँच के बाद ही रत्न पहनें; केवल अपनी राशि देखकर रत्न कभी न चुनें।
- रत्न चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक या अन्य पेशेवर देखभाल का विकल्प कभी नहीं है। रत्न के कारण कोई उपचार न रोकें और न टालें।
- नीलम, गोमेद और लहसुनिया को परम्परा में विशेष सावधानी से बरता जाता है; अनेक ज्योतिषी इन्हें सावधानीपूर्वक विचार के बाद ही सुझाते हैं।
- पारम्परिक ग्रन्थ केवल प्राकृतिक, दोषरहित रत्नों को मान्य मानते हैं। किसी मान्यता-प्राप्त रत्न-परीक्षण प्रयोगशाला की रिपोर्ट माँगें: उपचारित, कृत्रिम और नकली रत्न आम हैं।
- आकार, गुणवत्ता, उत्पत्ति और उपचार के अनुसार दाम बहुत बदलते हैं। जल्दबाज़ी, डर दिखाकर दी गई सलाह या इस दावे से सावधान रहें कि महँगा रत्न ही एकमात्र उपाय है।
- उद्योग ज्योतिष रत्न नहीं बेचता और किसी विक्रेता से उसका कोई सम्बन्ध नहीं है। उपाय पृष्ठों पर दिए मन्त्र, पूजा और दान के उपायों के लिए कुछ ख़रीदना आवश्यक नहीं है।
रत्न
- रत्न शास्त्रीय
- माणिक्य (माणिक) (māṇikya)
- उपरत्न आधुनिक परिपाटी
- लाल गार्नेट (तामड़ा), लाल स्पिनेल
- धातु आधुनिक परिपाटी
- सोना या ताँबा
- उँगली आधुनिक परिपाटी
- अनामिका
- धारण का वार शास्त्रीय
- रविवार
Phaladeepika (Mantreshwara) ch. 2: the gems of the grahas from the Sun — māṇikya (ruby), muktā (pearl), vidruma (coral), marakata (emerald), puṣparāga (yellow sapphire), vajra (diamond), nīla (blue sapphire), gomeda (hessonite), vaiḍūrya (cat’s eye)
Ratna-pariksha tradition (Garuda Purana, Purva Khanda, the ratna-pariksha chapters; Buddhabhatta’s Ratnapariksha): describes the gems, their qualities and flaws (dosha), not a prescription to wear one for a graha
Substitute stones (uparatna), the metal of the setting and the finger: modern convention found in present-day gem and astrology manuals; no classical verse is known for them, and practitioners differ
पहली बार कब धारण करें बीटा
आपके स्थान पर अगले 30 दिनों में (29/10/2026 (गुरु) से) वे समय जब माणिक्य (माणिक) को पहली बार धारण करने की प्रचलित परिपाटियाँ पूरी होती हैं।
अभी समीक्षा नहीं हुई
धारण-समय के इस नियम की स्वचालित ज्योतिष समीक्षा अभी नहीं हुई है। यह यहाँ दी गई प्रचलित परिपाटियों को जोड़ता है, और परम्पराएँ भिन्न हैं: समय की पुष्टि अपने ज्योतिषी या कुल-पुरोहित से करें।
- वार: रविवार, ग्रह का अपना वार।
- समय: सूर्योदय के बाद सूर्य की होरा (दिन की पहली या आठवीं होरा)।
- रिक्ता तिथि (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) या अमावस्या नहीं, भद्रा (विष्टि करण) नहीं और राहु काल नहीं।
- नक्षत्र: अश्विनी, पुष्य, हस्त, मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती — क्षिप्र और मृदु नक्षत्र, जिन्हें मुहूर्त चिन्तामणि आभूषणों के लिए बताता है।
- शुक्ल पक्ष श्रेष्ठ है: यह दर्शाया जाता है, अनिवार्य नहीं।
Day and hora of the graha: common practice in gem-wearing manuals (no classical verse cited); Rahu like Saturn and Ketu like Mars ("shanivad rahuh, kujavat ketuh"); Rikta tithis, Amavasya, Bhadra and Rahu Kaal avoided as for every auspicious beginning; Kshipra and Mridu nakshatras for ornaments: Muhurta Chintamani, Nakshatra Prakarana
सभी शर्तें पूरी करने वाले समय
| तारीख | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| 01/11/2026 (रवि) | से होरा 1 | पुष्य | कृष्ण पक्ष सप्तमी |
| 01/11/2026 (रवि) | से होरा 8 | पुष्य | कृष्ण पक्ष सप्तमी |
| 22/11/2026 (रवि) | से होरा 1 | अश्विनी | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी शुक्ल |
| 22/11/2026 (रवि) | से होरा 8 | अश्विनी | शुक्ल पक्ष त्रयोदशी शुक्ल |
केवल वार और होरा (2)
ये वार, होरा, तिथि, भद्रा और राहु काल की शर्तें पूरी करते हैं; नक्षत्र ऊपर दिए नक्षत्रों में से नहीं है।
| तारीख | समय | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|
| 15/11/2026 (रवि) | से होरा 1 | उत्तराषाढ़ा | शुक्ल पक्ष षष्ठी शुक्ल |
| 15/11/2026 (रवि) | से होरा 8 | उत्तराषाढ़ा | शुक्ल पक्ष षष्ठी शुक्ल |
जाँचा नहीं गया: आपका अपना चन्द्र बल और तारा बल (इनके लिए आपका जन्म-चन्द्र चाहिए), उस समय का लग्न, और यह कि यह रत्न आपकी कुण्डली के अनुकूल है भी या नहीं।