केतुं कृण्वन्न (केतु वैदिक मन्त्र) Ketum Krinvanna (Vedic mantra for Ketu)
ग्रह-शान्ति अनुष्ठानों में केतु के लिए पढ़ा जाने वाला ऋग्वैदिक मन्त्र।
- देवता केतु
- प्रकार वैदिक मन्त्र
- भाषा संस्कृत
- परम्परा वैदिक
- स्रोत ऋग्वेद (शाकल शाखा) — Rigveda 1.6.3
मूल / शास्त्रीय पाठ सम्पादकीय जाँच
मार्गदर्शन-सूचना। वैदिक मन्त्र परम्परा से स्वर सहित गुरु से सीखे जाते हैं।
मूल पाठ
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मन्त्र
केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे ।ketuṃ kṛṇvannaketave peśo maryā apeśase |
समुषद्भिरजायथाः ॥samuṣadbhirajāyathāḥ ||
रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।
पारम्परिक सन्दर्भ
मन्त्र का शब्द 'केतु' (प्रकाश, ध्वज) ही केतु ग्रह के लिए इसके पारम्परिक प्रयोग का आधार है।
केतु के और पाठ
इन्हीं अवसरों के लिए
प्रश्न
केतुं कृण्वन्न (केतु वैदिक मन्त्र) क्या है?
ग्रह-शान्ति अनुष्ठानों में केतु के लिए पढ़ा जाने वाला ऋग्वैदिक मन्त्र।
केतुं कृण्वन्न (केतु वैदिक मन्त्र) किस देवता से जुड़ा है?
केतुं कृण्वन्न (केतु वैदिक मन्त्र) केतु से जुड़ा है। नवग्रहों में दक्षिण चन्द्र-पात, एक छाया ग्रह।
केतुं कृण्वन्न (केतु वैदिक मन्त्र) का अर्थ क्या है?
प्रकाशहीन को प्रकाश और रूपहीन को रूप देते हुए, हे मनुष्यो, तुम उषाओं के साथ प्रकट हुए।
केतुं कृण्वन्न (केतु वैदिक मन्त्र) का पारम्परिक प्रयोग कैसे होता है?
मन्त्र का शब्द 'केतु' (प्रकाश, ध्वज) ही केतु ग्रह के लिए इसके पारम्परिक प्रयोग का आधार है।
केतुं कृण्वन्न (केतु वैदिक मन्त्र) का स्रोत क्या है?
ऋग्वेद (शाकल शाखा) — Rigveda 1.6.3. परम्परा: वैदिक।
केतुं कृण्वन्न (केतु वैदिक मन्त्र) का उच्चारण कैसे करें?
इस लिपि और लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखाए गए हैं।