स्तुति · माँ दुर्गा

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये Sarva Mangala Mangalye

देवी माहात्म्य का देवी-स्तुति श्लोक, जो नवरात्र में व्यापक रूप से पढ़ा जाता है।

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मूल पाठ

श्लोक

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।sarvamaṅgalamāṅgalye śive sarvārthasādhike |

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo'stu te ||

रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।

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प्रश्न

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये क्या है?

देवी माहात्म्य का देवी-स्तुति श्लोक, जो नवरात्र में व्यापक रूप से पढ़ा जाता है।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये किस देवता से जुड़ा है?

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये माँ दुर्गा से जुड़ा है। महिषासुर का वध करने वाली अपराजिता देवी; दोनों नवरात्रों में विशेष रूप से पूजित। देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) उनका प्रमुख ग्रन्थ है।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये का अर्थ क्या है?

हे सब मंगलों की मंगलरूपा, कल्याणकारिणी शिवा, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, त्रिनेत्रा गौरी, नारायणी — आपको नमस्कार।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये का स्रोत क्या है?

देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती), मार्कण्डेय पुराण — Devi Mahatmya 11.10 (Narayani Stuti). परम्परा: शाक्त।

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