श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा Shri Vindhyeshwari Chalisa
विन्ध्याचल की देवी (विन्ध्यवासिनी) की चालीस चौपाइयाँ, जिनमें उनके अनेक रूपों के नाम हैं।
- देवता माँ दुर्गा
- प्रकार चालीसा
- भाषा हिन्दी
- परम्परा शाक्त
- स्रोत 51 चालीसा संग्रह (आरतियों सहित) — रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार (2004) — Scan pages 182–185
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दोहा
नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदम्ब ।namo namo vindhyeśvarī, namo namo jagadamba |
सन्त जनों के काज में, करती नहीं विलम्ब ॥santa janoṃ ke kāj meṃ, karatī nahīṃ vilamba ||
चौपाई 1
जय जय जय विन्ध्याचल रानी ।jay jay jay vindhyācal rānī |
आदि शक्ति जग विदित भवानी ॥ १ ॥ādi śakti jag vidit bhavānī || 1 ||
चौपाई 2
सिंहवाहिनी जय जगमाता ।siṃhavāhinī jay jagamātā |
जय जय जय त्रिभुवन सुखदाता ॥ २ ॥jay jay jay tribhuvan sukhadātā || 2 ||
चौपाई 3
कष्ट निवारिणी जय जग देवी ।kaṣṭa nivāriṇī jay jag devī |
जय जय सन्त असुर सुर सेवी ॥ ३ ॥jay jay santa asur sur sevī || 3 ||
चौपाई 4
महिमा अमित अपार तुम्हारी ।mahimā amit apār tumhārī |
शेष सहस मुख वर्णत हारी ॥ ४ ॥śeṣ sahas mukh varṇat hārī || 4 ||
चौपाई 5
दीनन के दुख हरत भवानी ।dīnan ke dukh harat bhavānī |
नहिं देख्यो तुम सम कोउ दानी ॥ ५ ॥nahiṃ dekhyo tum sam kou dānī || 5 ||
चौपाई 6
सब कर मनसा पुरवत माता ।sab kar manasā puravat mātā |
महिमा अमित जगत विख्याता ॥ ६ ॥mahimā amit jagat vikhyātā || 6 ||
चौपाई 7
जो जन ध्यान तुम्हारो लावै ।jo jan dhyān tumhāro lāvai |
सो तुरतहिं वांछित फल पावै ॥ ७ ॥so turatahiṃ vāṃchit phal pāvai || 7 ||
चौपाई 8
तू ही वैष्णवी तू ही रुद्रानी ।tū hī vaiṣṇavī tū hī rudrānī |
तू ही शारदा अरु ब्रह्माणी ॥ ८ ॥tū hī śāradā aru brahmāṇī || 8 ||
चौपाई 9
रमा राधिका श्यामा काली ।ramā rādhikā śyāmā kālī |
तू ही मातु सन्तन प्रतिपाली ॥ ९ ॥tū hī mātu santan pratipālī || 9 ||
चौपाई 10
उमा माधवी चण्डी ज्वाला ।umā mādhavī caṇḍī jvālā |
बेगि मोहि पर होहु दयाला ॥ १० ॥begi mohi par hohu dayālā || 10 ||
चौपाई 11
तू ही हिंगलाज महारानी ।tū hī hiṃgalāj mahārānī |
तू ही शीतला अरु विज्ञानी ॥ ११ ॥tū hī śītalā aru vijñānī || 11 ||
चौपाई 12
दुर्गा दुर्ग विनाशिनी माता ।durgā durga vināśinī mātā |
तू ही लक्ष्मी जग सुख दाता ॥ १२ ॥tū hī lakṣmī jag sukh dātā || 12 ||
चौपाई 13
तू ही जाह्नवी अरु उत्राणी ।tū hī jāhnavī aru utrāṇī |
हेमावती अम्ब निरवाणी ॥ १३ ॥hemāvatī amba niravāṇī || 13 ||
चौपाई 14
अष्ट भुजी वाराहिनी देवा ।aṣṭa bhujī vārāhinī devā |
करत विष्णु शिव जाकर सेवा ॥ १४ ॥karat viṣṇu śiv jākar sevā || 14 ||
चौपाई 15
चौसट्टी देवी कल्यानी ।causaṭṭī devī kalyānī |
गौरी मंगला सब गुण खानी ॥ १५ ॥gaurī maṃgalā sab guṇ khānī || 15 ||
चौपाई 16
पाटन मुम्बा दन्त कुमारी ।pāṭan mumbā danta kumārī |
भद्रकालि सुन विनय हमारी ॥ १६ ॥bhadrakāli sun vinay hamārī || 16 ||
चौपाई 17
वज्र धारिणी शोक नाशिनी ।vajra dhāriṇī śok nāśinī |
आयु रक्षिणी विन्ध्यवासिनी ॥ १७ ॥āyu rakṣiṇī vindhyavāsinī || 17 ||
चौपाई 18
जया और विजया बैताली ।jayā aur vijayā baitālī |
मात संकटी अरु विकराली ॥ १८ ॥māt saṃkaṭī aru vikarālī || 18 ||
चौपाई 19
नाम अनन्त तुम्हार भवानी ।nām ananta tumhār bhavānī |
बरनै किमि मानुष अज्ञानी ॥ १९ ॥baranai kimi mānuṣ ajñānī || 19 ||
चौपाई 20
जापर कृपा मात तव होई ।jāpar kṛpā māt tav hoī |
तो वह करै चहै मन जोई ॥ २० ॥to vah karai cahai man joī || 20 ||
चौपाई 21
कृपा करहु मोपर महारानी ।kṛpā karahu mopar mahārānī |
सिद्ध करिए अब यह मम बानी ॥ २१ ॥siddha karie ab yah mam bānī || 21 ||
चौपाई 22
जो नर धरै मात कर ध्याना ।jo nar dharai māt kar dhyānā |
ताकर सदा होय कल्याना ॥ २२ ॥tākar sadā hoy kalyānā || 22 ||
चौपाई 23
विपति ताहि सपनेहु नहिं आवै ।vipati tāhi sapanehu nahiṃ āvai |
जो देवी का जाप करावै ॥ २३ ॥jo devī kā jāp karāvai || 23 ||
चौपाई 24
जो नर कहं ऋण होय अपारा ।jo nar kahaṃ ṛṇ hoy apārā |
सो नर पाठ करे शतबारा ॥ २४ ॥so nar pāṭh kare śatabārā || 24 ||
चौपाई 25
निश्चय ऋण मोचन होई जाई ।niścay ṛṇ mocan hoī jāī |
जो नर पाठ करे मन माई ॥ २५ ॥jo nar pāṭh kare man māī || 25 ||
चौपाई 26
अस्तुति जो नर पढ़ै पढ़ावै ।astuti jo nar paṛhai paṛhāvai |
या जग में सो अति सुख पावै ॥ २६ ॥yā jag meṃ so ati sukh pāvai || 26 ||
चौपाई 27
जाको व्याधि सतावे भाई ।jāko vyādhi satāve bhāī |
जाप करत सब दूर पराई ॥ २७ ॥jāp karat sab dūr parāī || 27 ||
चौपाई 28
जो नर अति बन्दी महँ होई ।jo nar ati bandī maham̐ hoī |
बार हजार पाठ कर सोई ॥ २८ ॥bār hajār pāṭh kar soī || 28 ||
चौपाई 29
निश्चय बन्दी ते छुटि जाई ।niścay bandī te chuṭi jāī |
सत्य वचन मम मानहु भाई ॥ २९ ॥satya vacan mam mānahu bhāī || 29 ||
चौपाई 30
जापर जो कछु संकट होई ।jāpar jo kachu saṃkaṭ hoī |
निश्चय देविहिं सुमिरे सोई ॥ ३० ॥niścay devihiṃ sumire soī || 30 ||
चौपाई 31
जा कहँ पुत्र होय नहिं भाई ।jā kaham̐ putra hoy nahiṃ bhāī |
सो नर या विधि करे उपाई ॥ ३१ ॥so nar yā vidhi kare upāī || 31 ||
चौपाई 32
पाँच वर्ष सो पाठ करावे ।pām̐c varṣa so pāṭh karāve |
नौरातन में विप्र जिमावे ॥ ३२ ॥naurātan meṃ vipra jimāve || 32 ||
चौपाई 33
निश्चय होहिं प्रसन्न भवानी ।niścay hohiṃ prasanna bhavānī |
पुत्र देहिं ताकहँ गुणखानी ॥ ३३ ॥putra dehiṃ tākaham̐ guṇakhānī || 33 ||
चौपाई 34
ध्वजा नारियल आन चढ़ावे ।dhvajā nāriyal ān caṛhāve |
विधि समेत पूजन करवावे ॥ ३४ ॥vidhi samet pūjan karavāve || 34 ||
चौपाई 35
नित्य प्रति पाठ करे मन लाई ।nitya prati pāṭh kare man lāī |
प्रेम सहित नहिं आन उपाई ॥ ३५ ॥prem sahit nahiṃ ān upāī || 35 ||
चौपाई 36
यह श्री विन्ध्याचल चालीसा ।yah śrī vindhyācal cālīsā |
रंक पढ़त होवे अवनीसा ॥ ३६ ॥raṃk paṛhat hove avanīsā || 36 ||
चौपाई 37
यह जनि अचरज मानहुँ भाई ।yah jani acaraj mānahum̐ bhāī |
कृपा दृष्टि जापर हुई जाई ॥ ३७ ॥kṛpā dṛṣṭi jāpar huī jāī || 37 ||
चौपाई 38
जय जय जय जग मातु भवानी ।jay jay jay jag mātu bhavānī |
कृपा करहु मोहिं पर जन जानी ॥ ३८ ॥kṛpā karahu mohiṃ par jan jānī || 38 ||
मुद्रित प्रति के स्कैन से पंक्ति-दर-पंक्ति लिखा गया और एक स्वतन्त्र प्रतिलिपि से अक्षरशः मिलाया गया। केवल वर्तनी के अन्तर में मुद्रित पाठ रखा गया है।
रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।
सम्बन्धित
माँ दुर्गा के और पाठ
- आरती · माँ दुर्गा जय अम्बे गौरी Jai Ambe Gauri
- स्तोत्र · माँ दुर्गा महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र Mahishasura Mardini Stotram
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इन्हीं अवसरों के लिए
प्रश्न
श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा क्या है?
विन्ध्याचल की देवी (विन्ध्यवासिनी) की चालीस चौपाइयाँ, जिनमें उनके अनेक रूपों के नाम हैं।
श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा किस देवता से जुड़ा है?
श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा माँ दुर्गा से जुड़ा है। महिषासुर का वध करने वाली अपराजिता देवी; दोनों नवरात्रों में विशेष रूप से पूजित। देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) उनका प्रमुख ग्रन्थ है।
श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा का अर्थ क्या है?
विन्ध्याचल की देवी की स्तुति सिंहवाहिनी आदि शक्ति के रूप में है, जो वैष्णवी, रुद्राणी, शारदा, ब्रह्माणी, काली, हिंगलाज, शीतला, दुर्गा, लक्ष्मी और गंगा भी हैं। बाद के पद कहते हैं कि पाठ करने या कराने से ऋण, रोग और बन्धन दूर होते हैं और सन्तान मिलती है, और नवरात्र में ध्वजा-नारियल चढ़ाने व ब्राह्मण भोज का वर्णन है।
श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा का स्रोत क्या है?
पारम्परिक भक्ति पाठ (प्रचलित मुद्रित एवं मौखिक रूप) — Shri Vindhyeshwari Chalisa. परम्परा: शाक्त।
क्या श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा के अलग-अलग संस्करण हैं?
चालीसा की मुद्रित प्रतियों में वर्तनी, कुछ शब्दों और कभी-कभी पदों के क्रम में अन्तर मिलता है। यह पाठ टिप्पणी में बताई प्रति पर आधारित है।