असतो मा सद्गमय Asato Ma Sadgamaya
असत् से सत्, अन्धकार से प्रकाश और मृत्यु से अमरता की ओर ले जाने की प्रार्थना।
- प्रकार शान्ति मन्त्र
- भाषा संस्कृत
- परम्परा वैदिक
- स्रोत बृहदारण्यक उपनिषद् — Brihadaranyaka Upanishad 1.3.28
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मूल पाठ
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मन्त्र
ॐ असतो मा सद्गमय ।oṃ asato mā sadgamaya |
तमसो मा ज्योतिर्गमय ।tamaso mā jyotirgamaya |
मृत्योर्मा अमृतं गमय ।mṛtyormā amṛtaṃ gamaya |
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥oṃ śāntiḥ śāntiḥ śāntiḥ ||
रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।
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प्रश्न
असतो मा सद्गमय क्या है?
असत् से सत्, अन्धकार से प्रकाश और मृत्यु से अमरता की ओर ले जाने की प्रार्थना।
असतो मा सद्गमय का अर्थ क्या है?
मुझे असत् से सत् की ओर ले चलो; अन्धकार से प्रकाश की ओर ले चलो; मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो। ॐ शान्ति, शान्ति, शान्ति।
असतो मा सद्गमय का स्रोत क्या है?
बृहदारण्यक उपनिषद् — Brihadaranyaka Upanishad 1.3.28. परम्परा: वैदिक।
क्या असतो मा सद्गमय के अलग-अलग संस्करण हैं?
मुद्रित संस्करणों में अन्तिम पंक्ति की सन्धि में थोड़ा अन्तर मिलता है। अन्त का 'ॐ शान्तिः' पाठ में जोड़ा जाता है; यह उपनिषद् के मूल वचन का अंश नहीं है।