नन्हे पाठकों के लिए

होली पर हम रंगों से क्यों खेलते हैं?

एक बालक जो कभी नहीं डरा, एक होलिका की आग, और रंगों से भरी सुबह।

  1. एक बालक था जिसका नाम प्रह्लाद था। वह भगवान विष्णु से पूरे मन से प्रेम करता था और रोज़ प्रार्थना करता था। उसके पिता, राजा, बहुत घमंडी थे और चाहते थे कि सब केवल उन्हीं की पूजा करें।
  2. राजा की बहन होलिका ने एक बड़ी आग के पास प्रह्लाद के साथ छल करना चाहा। पर प्रह्लाद विष्णु का नाम लेता रहा और बिल्कुल नहीं डरा। वह सुरक्षित बाहर आ गया और होलिका का छल नाकाम हो गया।
  3. इसीलिए होली से पहले की रात लोग होलिका दहन की आग जलाते हैं। यह याद दिलाती है कि अच्छाई और विश्वास हमारी रक्षा करते हैं।
  4. अगली सुबह रंगों से भर जाती है! ब्रज में लोग याद करते हैं कि कैसे नन्हे कृष्ण राधा और अपने दोस्तों के साथ रंग खेलते थे।
  5. होली पर हम दोस्तों को गले लगाते हैं और हर झगड़ा भुला देते हैं। वसंत आ गया है, और सब एक बड़े, रंग-बिरंगे परिवार जैसे हैं।

क्या आप जानते हैं?

होली फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को, वसंत की शुरुआत में आती है।

कुछ बनाइए

एक रंग-चक्र बनाइए: दो रंग मिलाकर देखिए कि कौन-सा नया रंग बनता है। होली हमेशा हल्के, सुरक्षित रंगों से खेलिए और जो न चाहे उसे रंग मत लगाइए।

इस साल होली (धुलेंडी) सोमवार, 22 मार्च 2027 को है। बड़ों के लिए तिथि और मुहूर्त

अलग-अलग परिवार और क्षेत्र ये कहानियाँ अलग-अलग ढंग से सुनाते हैं। यह बच्चों के लिए एक सरल रूप है।