धनतेरस (धनत्रयोदशी)
प्रदोष काल में त्रयोदशी; धन्वन्तरि और लक्ष्मी-कुबेर पूजन।
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- श्रेणीत्योहार प्रमुख
- देवताभगवान धन्वन्तरि
- निर्धारक तिथि / क्षणकृष्ण पक्ष त्रयोदशी: से
- चान्द्र मासआश्विन कृष्ण पक्ष (अमान्त) · कार्तिक कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 का समय
- प्रदोष काल से 2 घं 2 मि · 06/11/2026 (शुक्र)
लागू नियम: स्मार्त — तिथि आवश्यक काल को केवल इसी दिन व्याप्त करती है।
धनतेरस (धनत्रयोदशी) के बारे में
महत्त्व
धनतेरस, या धनत्रयोदशी, कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को दीपावली के पाँच दिनों का आरम्भ करती है। यह देवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के दैवी स्रोत धन्वन्तरि को समर्पित है, जो भागवत पुराण में समुद्र मन्थन के वर्णन (अष्टम स्कन्ध, अध्याय 8) के अनुसार अमृत कलश लेकर जल से प्रकट हुए। इसलिए यह धन्वन्तरि जयन्ती भी है; भारत सरकार 2016 से इसी दिन आयुर्वेद दिवस मनाती रही, फिर 2025 में आयुर्वेद दिवस के लिए 23 सितम्बर की स्थायी तारीख तय की गई।
यही संध्या धन के कोषाध्यक्ष कुबेर और लक्ष्मी से, तथा मृत्यु के देवता यम से भी जुड़ी है। धर्मशास्त्रीय निबन्धों में उद्धृत एक श्लोक इस त्रयोदशी को रात्रि के आरम्भ में घर के बाहर यम के लिए दीप रखने का विधान करता है, और एक लोक-कथा उस राजकुमार की है जिसकी मृत्यु विवाह की चौथी रात को लिखी थी; उसकी पत्नी ने दीपों, गीतों और द्वार पर गहनों के ढेर से उसे जगाए रखा, और सर्प रूप में आए यम लौट गए। माना जाता है कि यम-दीप परिवार से अकाल मृत्यु को दूर रखता है।
कैसे और कहाँ मनाया जाता है
धनतेरस पूरे उत्तर और पश्चिम भारत में तथा अन्यत्र अनेक समुदायों में मनाई जाती है; महाराष्ट्र में यह धनत्रयोदशी है, और दक्षिण में, विशेषकर आयुर्वेद के चिकित्सकों के बीच, मुख्य बल धन्वन्तरि पूजा पर रहता है। अनेक व्यापारी और परिवार इस दिन धातु के बर्तन, सोना-चाँदी या अपने काम के औज़ार ख़रीदते हैं। यह इस मौसम की एक प्रथा है; इस दिन का वर्णन करने वाले ग्रंथ ख़रीद की नहीं, पूजा और दीपदान की बात करते हैं।
विधि और परम्पराएँ
घरों की सफ़ाई होती है, उन्हें रंगोली और दीपों से सजाया जाता है, और आने वाली लक्ष्मी पूजा के लिए नए बर्तन रखे जाते हैं। संध्या को धन्वन्तरि की पूजा होती है, अनेक घरों में लक्ष्मी और कुबेर के साथ, और यम के लिए आटे या मिट्टी का दक्षिणमुखी दीप द्वार के बाहर रखा जाता है। आयुर्वेदिक संस्थाएँ धन्वन्तरि पूजा करती हैं, और महाराष्ट्र में अनेक परिवार धनिया और गुड़ का नैवेद्य चढ़ाते हैं।
तिथि कैसे तय होती है
धनतेरस उत्तर भारत की पूर्णिमान्त गणना में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी और अमान्त पंचांगों में आश्विन कृष्ण त्रयोदशी है। इसकी पूजा और यम-दीप संध्या के हैं, इसलिए त्रयोदशी का प्रदोष काल में, यानी सूर्यास्त से रात्रि के पाँचवें भाग तक, व्याप्त होना आवश्यक है। दो संध्याओं के प्रदोष में त्रयोदशी हो तो अधिक व्याप्ति वाली संध्या ली जाती है; किसी में न हो तो वह दिन जिसमें त्रयोदशी सबसे अधिक समय रहे। संध्या निर्णायक है, इसलिए तारीख उस पंचांग से भिन्न हो सकती है जो सुबह की त्रयोदशी देखता है।
स्रोत
- Bhagavata Purana, Canto 8, chapter 8: the churning of the ocean and Dhanvantari
- Nirnaya Sindhu, Kartika-masa: Yama-deepa-dana on Krishna Trayodashi
- All India Radio News (Government of India): Government declares 23 September as Ayurveda Day
- Encyclopaedia Britannica: Dhanteras
रीति-रिवाज़ क्षेत्र, समुदाय और परिवार के अनुसार भिन्न होते हैं; यह विवरण पृष्ठभूमि है, विधान नहीं। ऊपर दी गई तिथि इस पृष्ठ पर बताए गए नियम से गणना की गई है।
पूजा विधि
मंत्र और भक्ति
पूरे भारत में
यह त्योहार अलग-अलग क्षेत्रों में कैसे मनाया जाता है, क्षेत्रीय नामों और हर तिथि के नियम के साथ।
तिथि का निर्धारण कैसे होता है
- अमान्त पद्धति (मास अमावस्या पर समाप्त) में यह आश्विन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी है; उत्तर भारत के अधिकांश भाग में प्रचलित पूर्णिमान्त पद्धति (मास पूर्णिमा पर समाप्त) में यही दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी कहलाता है।
- यह उस दिन होता है जिस दिन प्रदोष काल में यह तिथि व्याप्त हो — सूर्यास्त के बाद रात्रि का पहला पंचमांश।
- यदि तिथि लगातार दो दिन उस काल में व्याप्त हो तो जिस दिन वह उस काल के अधिक भाग में रहे, वह दिन लिया जाता है।
- यदि तिथि किसी भी दिन उस काल को स्पर्श न करे (क्षय तिथि), तो जिस हिन्दू दिन में तिथि सबसे अधिक समय रहे, वह दिन लिया जाता है।
- जिस वर्ष उसी नाम का अधिक मास हो, उस वर्ष यह शुद्ध (निज) मास में मनाया जाता है।
पारम्परिक भिन्नता
यह ऊपर दिए नियम के अनुसार चुने गए स्थान के लिए तिथि है। यही एकमात्र मान्य तिथि नहीं है: क्षेत्रीय पंचांग, पारिवारिक परम्परा और सम्प्रदाय इसे अलग दिन भी मना सकते हैं।
नियम का स्रोत: Tithi–kaal rule of the Dharmashastra digests (Nirnaya Sindhu / Dharma Sindhu), as applied by modern drik-ganita (computed) Panchangs
परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।
गणना: इंजन 1.4.2 · नियम rules-2026-10-21-2ab12b5d · प्रोफ़ाइल north-lahiri-calibrated v1 · अयनांश lahiri_drik_compat · astronomy-engine@2.1.19 · Australia/Melbourne
2026 की तिथियाँ
| दिनांक | निर्धारक तिथि / क्षण | समय अवधि | निर्णय टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| 06/11/2026 (शुक्र)
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आश्विन कृष्ण पक्ष (अमान्त) · कार्तिक कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त) |
कृष्ण पक्ष त्रयोदशी: से |
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2027 की तिथियाँ
| दिनांक | निर्धारक तिथि / क्षण | समय अवधि | निर्णय टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| 27/10/2027 (बुध)
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमान्त) · कार्तिक कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त) |
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