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त्योहार और व्रत 18
- पूर्णिमा पूर्णिमा तिथि (उदया तिथि)।
- पूर्णिमा श्राद्ध पूर्णिमा को दिवंगत पितरों का श्राद्ध; पितृ पक्ष से पूर्व।
- बुद्ध पूर्णिमा वैशाख पूर्णिमा; भगवान बुद्ध के जन्म, बोध और निर्वाण की स्मृति।
- गुरु पूर्णिमा आषाढ़ पूर्णिमा; गुरु वन्दन का पर्व, व्यास पूर्णिमा।
- कार्तिक पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा, कार्तिक स्नान और दीपदान के मास की समापन पूर्णिमा; स्नान और दान उस दिन होता है जिस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा हो।
- शरद पूर्णिमा आश्विन पूर्णिमा; रात्रि में कोजागर लक्ष्मी पूजा।
- वट पूर्णिमा अमान्त क्षेत्रों में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत।
- रक्षा बन्धन श्रावण पूर्णिमा; राखी पारम्परिक रूप से अपराह्न में, भद्रा रहित समय में बाँधी जाती है।
- दत्त जयन्ती मार्गशीर्ष पूर्णिमा की संध्या को भगवान दत्तात्रेय का जन्म।
- देव दीपावली (त्रिपुरोत्सव) कार्तिक पूर्णिमा (त्रिपुरारी पूर्णिमा) की संध्या को दीपदान, त्रिपुरासुर पर शिव की विजय का उत्सव। यहाँ तिथि वह संध्या है जिसमें प्रदोष काल में पूर्णिमा हो; वाराणसी के घाटों का देव दीपावली महोत्सव प्रायः कार्तिक पूर्णिमा के दिन (सूर्योदय पर पूर्णिमा) होता है, जो भिन्न होने पर विकल्प के रूप में दिखाया जाता है।
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा) कार्तिक अमावस्या (पूर्णिमान्त) को प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन।
- हनुमान जयन्ती चैत्र पूर्णिमा पर श्री हनुमान जन्मोत्सव (उत्तर भारतीय परम्परा)।
- होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा को प्रदोष काल में भद्रा रहित होलिका दहन।
- करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी (पूर्णिमान्त) को सुहागिनों का व्रत, चन्द्र दर्शन के बाद पारण।
- कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण (पूर्णिमान्त) अष्टमी की मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्म। स्मार्त तिथि: निशीथ में अष्टमी, दो रात्रियों में रोहिणी (जयन्ती योग) से निर्णय; वैष्णव (इस्कॉन) तिथि साथ में दर्शाई जाती है।
- सावित्री अमावस्या (ओडिशा) ओडिशा में ज्येष्ठ अमावस्या (पूर्णिमान्त) पर सौभाग्य के लिए सावित्री व्रत; सूर्योदय के समय अमावस्या वाला दिन, जैसा ओडिशा सरकार की अवकाश सूची में है।
- शनि जयन्ती ज्येष्ठ अमावस्या (पूर्णिमान्त) पर शनि देव जयन्ती।
- वट सावित्री व्रत (अमावस्या) उत्तर भारत में ज्येष्ठ अमावस्या (पूर्णिमान्त) पर वट वृक्ष पूजन सहित सौभाग्य व्रत; अपराह्न में अमावस्या वाला दिन।
मंत्र और भक्ति 10
- पूर्णिमा सत्यनारायण पूजा और कथा विधि पूर्णिमा या किसी शुभ अवसर पर सत्यनारायण पूजा कैसे करें — मंडप, कलश, पंचामृत, सवाया प्रसाद, पाँच अध्यायों की कथा और आरती।
- संकटनाशन गणेश स्तोत्र गणेश जी के बारह नामों वाला छोटा स्तोत्र, जिसका पाठ विघ्न और संकट दूर करने के लिए किया जाता है।
- ॐ जय जगदीश हरे भगवान विष्णु (जगदीश) की आरती।
- ॐ जय लक्ष्मी माता माता लक्ष्मी की आरती।
- गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः (गुरु वन्दना) गुरु को नमन का सबसे प्रसिद्ध श्लोक, जो अध्ययन से पहले और गुरु पूर्णिमा पर पढ़ा जाता है।
- महालक्ष्म्यष्टकम् महालक्ष्मी की आठ श्लोकों की स्तुति, जिसका हर श्लोक 'महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते' पर समाप्त होता है; शुक्रवार और दीपावली पर पढ़ी जाती है।
- श्री लक्ष्मी चालीसा समुद्र-पुत्री माँ लक्ष्मी की चालीस चौपाइयाँ, जिनमें ज्ञान, समृद्धि और संकट से मुक्ति की प्रार्थना है।
- ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः लक्ष्मी जी के बीज 'श्रीं' सहित प्रचलित मन्त्र, शुक्रवार और दीपावली पर जपा जाता है।
- विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र महाभारत में भीष्म पितामह द्वारा युधिष्ठिर को बताए गए भगवान विष्णु के एक हज़ार नाम, पारम्परिक प्रारम्भिक प्रार्थनाओं, न्यास-ध्यान और अन्तिम फलश्रुति सहित।
- श्री गोरखनाथ चालीसा नाथ परम्परा के महायोगी गुरु गोरखनाथ की चालीस चौपाइयाँ।
लेख 3
- अमान्त और पूर्णिमान्त: चान्द्र मास गिनने की दो पद्धतियाँ अमान्त पद्धति में चान्द्र मास अमावस्या पर समाप्त होता है, पूर्णिमान्त में पूर्णिमा पर। दोनों में पर्व की तिथि एक ही रहती है; केवल कृष्ण पक्ष के मास का नाम बदलता है।
- होलिका दहन और होली: मुहूर्त और भद्रा होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा को प्रदोष काल में, भद्रा से बचकर किया जाता है, और अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। जानिए समय कैसे तय होता है।
- तिथि: चान्द्र दिवस की पूरी जानकारी तिथि वह समय है जिसमें चन्द्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। 30 तिथियाँ मिलकर एक चान्द्र मास बनाती हैं, जो शुक्ल और कृष्ण पक्ष में बँटा होता है।