प्रसाद · भोग · नैवेद्य · उत्तर भारत

चावल की खीर

दूध में धीरे-धीरे पके चावल की मलाईदार खीर — शरद पूर्णिमा, श्राद्ध और अनेक पर्वों पर अर्पित।

तैयारी30 मिनट
पकाने में45 मिनट
कितने लोगों के लिए6

व्रत में उपयुक्तता

बिना नमकबिना प्याज़-लहसुन

इसमें अनाज या दालें हैं, इसलिए यह प्रायः त्योहार के प्रसाद के रूप में बनता है, कठोर व्रत में नहीं खाया जाता।

व्रत और भोग की परम्पराएँ परिवार, क्षेत्र और सम्प्रदाय के अनुसार अलग-अलग होती हैं — कुछ लोग नमक, दूध, चीनी या कुछ सब्ज़ियाँ बिल्कुल नहीं लेते। अपनी परम्परा और बड़ों के मार्गदर्शन का पालन करें।

कब अर्पित करते हैं

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा और लक्ष्मी (रात भर चाँदनी में रखी जाती है); श्राद्ध में पितरों को; दिवाली पर लक्ष्मी को

सामग्री

6 लोगों के लिए। 1 कप = 240 मि.ली.।

  • 1 लीटर फुल-क्रीम दूध
  • ¼ कप छोटे दाने का चावल, धोकर 30 मिनट भिगोया हुआ
  • ⅓ कप चीनी
  • ½ छोटा चम्मच इलायची पाउडर
  • 8–10 केसर के धागे (इच्छानुसार)
  • 2 बड़े चम्मच कटे बादाम, काजू और किशमिश

विधि

  1. भारी बर्तन में दूध उबालें।
  2. चावल का पानी निकालें, उँगलियों से हल्का मसलें और दूध में डालें।
  3. धीमी आँच पर 35–40 मिनट पकाएँ, बार-बार चलाते और तली खुरचते रहें, जब तक चावल गल न जाए और दूध गाढ़ा-मलाईदार न हो जाए।
  4. चीनी डालकर 5 मिनट और पकाएँ। इलायची, केसर और मेवे डालें।
  5. गरम या ठंडी भोग लगाएँ। शरद पूर्णिमा पर इसे पतले कपड़े से ढककर रात भर चाँदनी में रखते हैं और सुबह प्रसाद बाँटते हैं।

कुछ परिवार चीनी की जगह गुड़ डालते हैं (दूध न फटे इसलिए गुड़ आँच बंद करके डालें)।

इन पर्वों पर ये भी चढ़ाए जाते हैं

ये विधियाँ हमारी संपादकीय टीम ने घरों की प्रचलित परम्परा के आधार पर लिखी हैं। माप: 1 कप = 240 मि.ली., 1 बड़ा चम्मच = 15 मि.ली., 1 छोटा चम्मच = 5 मि.ली.।

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