त्योहार · माँ लक्ष्मी

दीपावली (लक्ष्मी पूजा)

कार्तिक अमावस्या (पूर्णिमान्त) को प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन।

मालेगाँव, Maharashtra, India 20.5497°, 74.5346° Asia/Kolkata (UTC+05:30) उत्तर भारतीय · लाहिरी (समायोजित)

अगली तिथि नवंबर 2026 8 रविवार 2 दिन बाद

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त · रविवार, 8 नवंबर 2026

बीटा नियम स्वचालित ज्योतिष समीक्षा की प्रतीक्षा में

ये काल दीपावली के दिन-नियम को पंचांगों की स्थिर लग्न वाली परिपाटी के साथ जोड़ते हैं। इनकी गणना ठीक वैसे ही होती है जैसी बताई गई है, पर ये अभी प्लेटफ़ॉर्म की ज्योतिष समीक्षा (शास्त्रीय ग्रन्थों और प्रकाशित पंचांगों से स्वचालित समीक्षा) से नहीं गुज़रे हैं। अपने कुल-पुरोहित से पुष्टि करें।

प्रदोष में वृषभ (स्थिर) लग्न से 1 घं 59 मि

लक्ष्मी पूजा दीपावली की सन्ध्या को प्रदोष (सूर्यास्त से रात्रि के पाँचवें भाग तक) में अमावस्या रहते की जाती है। पंचांग इसे प्रदोष के उस भाग तक सीमित करते हैं जिसमें स्थिर लग्न उदय हो, ताकि लक्ष्मी स्थिर रहें; दीपावली पर वह राशि वृषभ होती है। रात्रि (महानिशीथ) में पूजा करने वाले सिंह लग्न या निशीथ मुहूर्त लेते हैं। स्थिर लग्न वाला यह संकोच धर्मशास्त्र का नियम नहीं, पंचांगों की परिपाटी है, और ये काल अभी प्लेटफ़ॉर्म की ज्योतिष समीक्षा से नहीं गुज़रे हैं। समय चुने गए स्थान के हैं।

रविवार, 8 नवंबर 2026 का समय

लागू नियम: स्मार्त — तिथि आवश्यक काल को केवल इसी दिन व्याप्त करती है।

पूजा विधि

पूजा कैसे करें मन्त्रों, पूजा-सामग्री की सूची और आपके शहर के इस वर्ष के पूजा-समय के साथ चरणबद्ध विधि।

मंत्र और भक्ति

इस पर्व के सभी मन्त्र, आरतियाँ और स्तोत्र

पूरे भारत में

यह त्योहार अलग-अलग क्षेत्रों में कैसे मनाया जाता है, क्षेत्रीय नामों और हर तिथि के नियम के साथ।

क्षेत्रीय मार्गदर्शिका पढ़ें

तिथि का निर्धारण कैसे होता है

  1. अमान्त पद्धति (मास अमावस्या पर समाप्त) में यह आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या है; उत्तर भारत के अधिकांश भाग में प्रचलित पूर्णिमान्त पद्धति (मास पूर्णिमा पर समाप्त) में यही दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या कहलाता है।
  2. यह उस दिन होता है जिस दिन प्रदोष काल में यह तिथि व्याप्त हो — सूर्यास्त के बाद रात्रि का पहला पंचमांश।
  3. यदि तिथि लगातार दो दिन उस काल में व्याप्त हो तो दूसरा दिन तभी लिया जाता है जब उसमें तिथि कम से कम 24 मिनट रहे; अन्यथा पहला दिन लिया जाता है।
  4. यदि तिथि किसी भी दिन उस काल को स्पर्श न करे (क्षय तिथि), तो जिस हिन्दू दिन में तिथि सबसे अधिक समय रहे, वह दिन लिया जाता है।
  5. जिस वर्ष उसी नाम का अधिक मास हो, उस वर्ष यह शुद्ध (निज) मास में मनाया जाता है।

पारम्परिक भिन्नता

अमावस्या दो संध्याओं में प्रदोष व्याप्त हो तो दूसरी संध्या तभी ली जाती है जब उसमें अमावस्या कम से कम एक घटी (24 मिनट) रहे। शास्त्रीय मत भिन्न हैं; क्षेत्रीय पंचांग देखें।

यह ऊपर दिए नियम के अनुसार चुने गए स्थान के लिए तिथि है। यही एकमात्र मान्य तिथि नहीं है: क्षेत्रीय पंचांग, पारिवारिक परम्परा और सम्प्रदाय इसे अलग दिन भी मना सकते हैं।

नियम का स्रोत: Tithi–kaal rule of the Dharmashastra digests (Nirnaya Sindhu / Dharma Sindhu), as applied by modern drik-ganita (computed) Panchangs

परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।

गणना: इंजन 1.4.2 · नियम rules-2026-10-21-2ab12b5d · प्रोफ़ाइल north-lahiri-calibrated v1 · अयनांश lahiri_drik_compat · astronomy-engine@2.1.19 · Asia/Kolkata

2026 की तिथियाँ

दीपावली (लक्ष्मी पूजा) — 2026
दिनांकनिर्धारक तिथि / क्षणसमय अवधिनिर्णय टिप्पणी
08/11/2026 (रवि) अगली
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमान्त) · कार्तिक कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
कृष्ण पक्ष अमावस्या: से
  • प्रदोष काल से (2 घं 33 मि)
सामान्य नियम लागू

2027 की तिथियाँ

दीपावली (लक्ष्मी पूजा) — 2027
दिनांकनिर्धारक तिथि / क्षणसमय अवधिनिर्णय टिप्पणी
29/10/2027 (शुक्र)
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमान्त) · कार्तिक कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
कृष्ण पक्ष अमावस्या: से
  • प्रदोष काल से (1 घं 8 मि)
सामान्य नियम लागू

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