त्योहार · सूर्य देव

छठ पूजा

सूर्य षष्ठी। दर्शाई गई तिथि अस्ताचलगामी सूर्य को संध्या अर्घ्य का दिन है, अर्थात् पंचमी के दिन के खरना के बाद का षष्ठी वाला दिन; अगले सूर्योदय पर उदीयमान सूर्य को उषा अर्घ्य होता है, जिसके बाद व्रत का पारण होता है।

जयपुर, Rajasthan, India 26.9196°, 75.7878° Asia/Kolkata (UTC+05:30) उत्तर भारतीय · लाहिरी (समायोजित)

बीटा नियम ज्योतिष समीक्षा की प्रतीक्षा में

इस पर्व का तिथि-नियम ठीक वैसे ही लागू किया गया है जैसे प्रलेखित है, परन्तु यह अभी प्लेटफ़ॉर्म की ज्योतिष समीक्षा (शास्त्रीय ग्रन्थों और प्रकाशित पंचांगों के आधार पर स्वचालित समीक्षा) में उत्तीर्ण नहीं हुआ है। क्षेत्रीय पंचांगों में अंतर हो सकता है; अपने कुल पुरोहित या स्थानीय मन्दिर से पुष्टि करें।

अगली तिथि नवंबर 2026 15 रविवार 36 दिन बाद

रविवार, 15 नवंबर 2026 का समय

लागू नियम: क्षेत्रीय पंचांग — तिथि आवश्यक काल को केवल इसी दिन व्याप्त करती है।

यही तिथि क्यों?
  • इस दिन सूर्यास्त पर संध्या अर्घ्य; अगले सूर्योदय पर उषा अर्घ्य, जिसके बाद व्रत का पारण होता है।

पूजा विधि

मंत्र और भक्ति

इस पर्व के सभी मन्त्र, आरतियाँ और स्तोत्र

पूरे भारत में

यह त्योहार अलग-अलग क्षेत्रों में कैसे मनाया जाता है, क्षेत्रीय नामों और हर तिथि के नियम के साथ।

क्षेत्रीय मार्गदर्शिका पढ़ें

तिथि का निर्धारण कैसे होता है

  1. तिथि कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी है; अमान्त और पूर्णिमान्त दोनों पद्धतियों में मास का नाम एक ही है।
  2. यह उस दिन होता है जिस दिन स्थानीय सूर्योदय के समय यह तिथि व्याप्त हो (उदया तिथि)।
  3. यदि तिथि दो सूर्योदयों पर हो (वृद्धि तिथि) तो पहला दिन लिया जाता है।
  4. यदि तिथि किसी भी दिन उस काल को स्पर्श न करे (क्षय तिथि), तो जिस हिन्दू दिन में तिथि सबसे अधिक समय रहे, वह दिन लिया जाता है।
  5. दर्शाई गई तिथि संध्या अर्घ्य का दिन है, जब उस शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है; अगले सूर्योदय पर उदीयमान सूर्य को उषा अर्घ्य होता है, जिसके बाद व्रत का पारण होता है।
  6. क्षेत्रीय अपवाद, जो 2025 की बिहार और पश्चिम बंगाल की अवकाश सूचियों से अनुमानित है और किसी पंचांग का लिखित नियम नहीं: कार्तिक शुक्ल पंचमी दो सूर्योदयों पर व्याप्त हो तो खरना इनमें से पहले दिन और संध्या अर्घ्य दूसरे दिन होता है, जिसकी संध्या को षष्ठी व्याप्त रहती है; तब सूर्योदय की षष्ठी वाला दिन "नहीं चुना गया" में दिखाया जाता है।
  7. जिस वर्ष उसी नाम का अधिक मास हो, उस वर्ष यह शुद्ध (निज) मास में मनाया जाता है।

पारम्परिक भिन्नता

छठ चार दिन का पर्व है: नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य (दर्शाई गई तिथि) और अगली सुबह उषा अर्घ्य। संध्या अर्घ्य उस दिन होता है जिसके सूर्योदय के समय कार्तिक शुक्ल षष्ठी हो, जैसा भारत सरकार का पंचांग (राष्ट्रीय पंचांग) छठ की तिथि देता है; षष्ठी दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन लिया जाता है, क्योंकि केवल उसी की संध्या के अर्घ्य के समय षष्ठी रहती है। पंचमी दो सूर्योदयों पर व्याप्त हो तो इसके स्थान पर इनमें से दूसरा दिन दिखाया जाता है (2025 में पटना और कोलकाता में 27 अक्टूबर, बिहार और पश्चिम बंगाल की अवकाश सूचियों की तिथि): यह इन्हीं दो सूचियों से अनुमानित क्षेत्रीय अपवाद है, किसी पंचांग का लिखित नियम नहीं। राष्ट्रीय पंचांग और भारत सरकार की अवकाश सूची 28 अक्टूबर 2025 देते हैं, जिस दिन बिहार में सूर्योदय के समय षष्ठी है; जहाँ अपवाद लागू होता है, वह दिन "नहीं चुना गया" में दिखाया जाता है।

यह ऊपर दिए नियम के अनुसार चुने गए स्थान के लिए तिथि है। यही एकमात्र मान्य तिथि नहीं है: क्षेत्रीय पंचांग, पारिवारिक परम्परा और सम्प्रदाय इसे अलग दिन भी मना सकते हैं।

नियम का स्रोत: Surya-shashthi (Pratihara-shashthi), a regional vrata of Bihar and Mithila (no Nirnaya Sindhu or Dharma Sindhu ruling found): Nahay-Khay, Kharna, the Sandhya Arghya (the date shown), the Usha Arghya at the next sunrise. The Sandhya Arghya day is the day of Kartika Shukla Shashthi at sunrise (two sunrises → the first; none → the day it lies in). Government of India almanac (Rashtriya Panchang, IMD), Chhath (Bihar): 7 Nov 2024, 28 Oct 2025 (Saka 1947, item 62: Shashthi at sunrise in Bihar only that day), 15 Nov 2026. DoPT: 13 Nov 2018, 2 Nov 2019, 20 Nov 2020, 10 Nov 2021, 19 Nov 2023, 7 Nov 2024, 28 Oct 2025, 15 Nov 2026, 4 Nov 2027. Regional exception, not confirmed by any almanac: Panchami at two sunrises → the second day, inferred from the 2025 lists of Bihar (Kharna 26 Oct, Chhath 27 and 28 Oct) and West Bengal (27 Oct). "Shashthi at sunset" was rejected: it contradicts 10 Nov 2021 and 19 Nov 2023.

परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।

गणना: इंजन 1.4.2 · नियम rules-2026-09-29-a0a4505e · प्रोफ़ाइल north-lahiri-calibrated v1 · अयनांश lahiri_drik_compat · astronomy-engine@2.1.19 · Asia/Kolkata

2026 की तिथियाँ

छठ पूजा — 2026
दिनांकनिर्धारक तिथि / क्षणसमय अवधिनिर्णय टिप्पणी
15/11/2026 (रवि) अगली
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
शुक्ल पक्ष षष्ठी: से
  • संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त)

पारण: 16/11/2026 (सोम), के बाद — उदीयमान सूर्य को उषा अर्घ्य; इसके बाद व्रत का पारण होता है।

  • इस दिन सूर्यास्त पर संध्या अर्घ्य; अगले सूर्योदय पर उषा अर्घ्य, जिसके बाद व्रत का पारण होता है।

2027 की तिथियाँ

छठ पूजा — 2027
दिनांकनिर्धारक तिथि / क्षणसमय अवधिनिर्णय टिप्पणी
04/11/2027 (गुरु)
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
शुक्ल पक्ष षष्ठी: से
  • संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त)

पारण: 05/11/2027 (शुक्र), के बाद — उदीयमान सूर्य को उषा अर्घ्य; इसके बाद व्रत का पारण होता है।

  • इस दिन सूर्यास्त पर संध्या अर्घ्य; अगले सूर्योदय पर उषा अर्घ्य, जिसके बाद व्रत का पारण होता है।

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