श्री तुलसी चालीसा Shri Tulsi Chalisa
विष्णुप्रिया तुलसी की चालीस चौपाइयाँ, पूजा की पारम्परिक विधि सहित।
- देवता तुलसी माता
- प्रकार चालीसा
- भाषा हिन्दी
- परम्परा वैष्णव
- स्रोत 51 चालीसा संग्रह (आरतियों सहित) — रणधीर प्रकाशन, हरिद्वार (2004) — Scan pages 229–232
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दोहा
श्री तुलसी महारानी, करूँ विनय सिरनाय ।śrī tulasī mahārānī, karūm̐ vinay siranāy |
जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय ॥jo mam ho saṃkaṭ vikaṭ, dījai māt naśāy ||
चौपाई 1
नमो नमो तुलसी महारानी ।namo namo tulasī mahārānī |
महिमा अमित न जाय बखानी ॥ १ ॥mahimā amit na jāy bakhānī || 1 ||
चौपाई 2
दियो विष्णु तुमको सनमाना ।diyo viṣṇu tumako sanamānā |
जग में छायो सुयश महाना ॥ २ ॥jag meṃ chāyo suyaś mahānā || 2 ||
चौपाई 3
विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि ।viṣṇupriyā jay jayatibhavāni |
तिहूं लोक की हो सुखखानी ॥ ३ ॥tihūṃ lok kī ho sukhakhānī || 3 ||
चौपाई 4
भगवत पूजा कर जो कोई ।bhagavat pūjā kar jo koī |
बिना तुम्हारे सफल न होई ॥ ४ ॥binā tumhāre saphal na hoī || 4 ||
चौपाई 5
जिन घर तव नहिं होय निवासा ।jin ghar tav nahiṃ hoy nivāsā |
उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा ॥ ५ ॥us par karahiṃ viṣṇu nahiṃ bāsā || 5 ||
चौपाई 6
करे सदा जो तव नित सुमिरन ।kare sadā jo tav nit sumiran |
तेहिके काज होय सब पूरन ॥ ६ ॥tehike kāj hoy sab pūran || 6 ||
चौपाई 7
कातिक मास महात्म तुम्हारा ।kātik mās mahātma tumhārā |
ताको जानत सब संसारा ॥ ७ ॥tāko jānat sab saṃsārā || 7 ||
चौपाई 8
तव पूजन जो करैं कुंवारी ।tav pūjan jo karaiṃ kuṃvārī |
पावै सुन्दर वर सुकुमारी ॥ ८ ॥pāvai sundar var sukumārī || 8 ||
चौपाई 9
कर जो पूजा नितप्रति नारी ।kar jo pūjā nitaprati nārī |
सुख सम्पत्ति से होय सुखारी ॥ ९ ॥sukh sampatti se hoy sukhārī || 9 ||
चौपाई 10
वृद्धा नारी करै जो पूजन ।vṛddhā nārī karai jo pūjan |
मिले भक्ति होवै पुलकित मन ॥ १० ॥mile bhakti hovai pulakit man || 10 ||
चौपाई 11
श्रद्धा से पूजै जो कोई ।śraddhā se pūjai jo koī |
भवनिधि से तर जावै सोई ॥ ११ ॥bhavanidhi se tar jāvai soī || 11 ||
चौपाई 12
कथा भागवत यज्ञ करावै ।kathā bhāgavat yajña karāvai |
तुम बिन नहीं सफलता पावै ॥ १२ ॥tum bin nahīṃ saphalatā pāvai || 12 ||
चौपाई 13
छायो तब प्रताप जगभारी ।chāyo tab pratāp jagabhārī |
ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी ॥ १३ ॥dhyāvat tumahiṃ sakal citadhārī || 13 ||
चौपाई 14
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन में ।tumhīṃ māt yaṃtran taṃtran meṃ |
सकल काज सिधि होवै क्षण में ॥ १४ ॥sakal kāj sidhi hovai kṣaṇ meṃ || 14 ||
चौपाई 15
औषधि रूप आप हो माता ।auṣadhi rūp āp ho mātā |
सब जग में तव यश विख्याता ॥ १५ ॥sab jag meṃ tav yaś vikhyātā || 15 ||
चौपाई 16
देव रिषी मुनि औ तपधारी ।dev riṣī muni au tapadhārī |
करत सदा तव जय जयकारी ॥ १६ ॥karat sadā tav jay jayakārī || 16 ||
चौपाई 17
वेद पुरानन तव यश गाया ।ved purānan tav yaś gāyā |
महिमा अगम पार नहिं पाया ॥ १७ ॥mahimā agam pār nahiṃ pāyā || 17 ||
चौपाई 18
नमो नमो जै जै सुखकारनि ।namo namo jai jai sukhakārani |
नमो नमो जै दुखनिवारनि ॥ १८ ॥namo namo jai dukhanivārani || 18 ||
चौपाई 19
नमो नमो सुखसम्पति देनी ।namo namo sukhasampati denī |
नमो नमो अघ काटन छेनी ॥ १९ ॥namo namo agh kāṭan chenī || 19 ||
चौपाई 20
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी ।namo namo bhaktan duḥkh haranī |
नमो नमो दुष्टन मद छेनी ॥ २० ॥namo namo duṣṭan mad chenī || 20 ||
चौपाई 21
नमो नमो भव पार उतारनि ।namo namo bhav pār utārani |
नमो नमो परलोक सुधारनि ॥ २१ ॥namo namo paralok sudhārani || 21 ||
चौपाई 22
नमो नमो निज भक्त उबारनि ।namo namo nij bhakta ubārani |
नमो नमो जनकाज संवारनि ॥ २२ ॥namo namo janakāj saṃvārani || 22 ||
चौपाई 23
नमो नमो जय कुमति नशावनि ।namo namo jay kumati naśāvani |
नमो नमो सब सुख उपजावनि ॥ २३ ॥namo namo sab sukh upajāvani || 23 ||
चौपाई 24
जयति जयति जय तुलसीमाई ।jayati jayati jay tulasīmāī |
ध्याऊँ तुमको शीश नवाई ॥ २४ ॥dhyāūm̐ tumako śīś navāī || 24 ||
चौपाई 25
निजजन जानि मोहि अपनाओ ।nijajan jāni mohi apanāo |
बिगड़े कारज आप बनाओ ॥ २५ ॥bigaṛe kāraj āp banāo || 25 ||
चौपाई 26
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी ।karūm̐ vinay maiṃ māt tumhārī |
पूरण आशा करहु हमारी ॥ २६ ॥pūraṇ āśā karahu hamārī || 26 ||
चौपाई 27
शरण चरण कर जोरि मनाऊँ ।śaraṇ caraṇ kar jori manāūm̐ |
निशदिन तेरे ही गुण गाऊँ ॥ २७ ॥niśadin tere hī guṇ gāūm̐ || 27 ||
चौपाई 28
करहु मात यह अब मोपर दाया ।karahu māt yah ab mopar dāyā |
निर्मल होय सकल ममकाया ॥ २८ ॥nirmal hoy sakal mamakāyā || 28 ||
चौपाई 29
मांगू मात यह बर दीजै ।māṃgū māt yah bar dījai |
सकल मनोरथ पूर्ण कीजै ॥ २९ ॥sakal manorath pūrṇa kījai || 29 ||
चौपाई 30
जानूं नहिं कुछ नेम अचारा ।jānūṃ nahiṃ kuch nem acārā |
छमहु मात अपराध हमारा ॥ ३० ॥chamahu māt aparādh hamārā || 30 ||
चौपाई 31
बारह मास करै जो पूजा ।bārah mās karai jo pūjā |
ता सम जग में और न दूजा ॥ ३१ ॥tā sam jag meṃ aur na dūjā || 31 ||
चौपाई 32
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे ।prathamahi gaṃgājal maṃgavāve |
फिर सुन्दर स्नान करावे ॥ ३२ ॥phir sundar snān karāve || 32 ||
चौपाई 33
चन्दन अक्षत पुष्प चढ़ावे ।candan akṣat puṣpa caṛhāve |
धूप दीप नैवेद्य लगावे ॥ ३३ ॥dhūp dīp naivedya lagāve || 33 ||
चौपाई 34
करे आचमन गंगा जल से ।kare ācaman gaṃgā jal se |
ध्यान करे हृदय निर्मल से ॥ ३४ ॥dhyān kare hṛday nirmal se || 34 ||
चौपाई 35
पाठ करे फिर चालीसा की ।pāṭh kare phir cālīsā kī |
अस्तुति करे मात तुलसा की ॥ ३५ ॥astuti kare māt tulasā kī || 35 ||
चौपाई 36
यह विधि पूजा करे हमेशा ।yah vidhi pūjā kare hameśā |
ताके तन नहिं रहै क्लेशा ॥ ३६ ॥tāke tan nahiṃ rahai kleśā || 36 ||
चौपाई 37
करै मास कार्तिक का साधन ।karai mās kārtik kā sādhan |
सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं ॥ ३७ ॥sove nit pavitra sidh huī jāhīṃ || 37 ||
चौपाई 38
है यह कथा महा सुखदाई ।hai yah kathā mahā sukhadāī |
पढ़ै सुने सो भव तर जाई ॥ ३८ ॥paṛhai sune so bhav tar jāī || 38 ||
दोहा
यह श्री तुलसी चालीसा, पाठ करे जो कोय ।yah śrī tulasī cālīsā, pāṭh kare jo koy |
गोविन्द सो फल पावही, जो मन इच्छा होय ॥govinda so phal pāvahī, jo man icchā hoy ||
मुद्रित प्रति के स्कैन से पंक्ति-दर-पंक्ति लिखा गया और एक स्वतन्त्र प्रति से अक्षरशः मिलाया गया। केवल वर्तनी के अन्तर में मुद्रित पाठ रखा गया है।
रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।
सम्बन्धित
प्रश्न
श्री तुलसी चालीसा क्या है?
विष्णुप्रिया तुलसी की चालीस चौपाइयाँ, पूजा की पारम्परिक विधि सहित।
श्री तुलसी चालीसा किस देवता से जुड़ा है?
श्री तुलसी चालीसा तुलसी माता से जुड़ा है। पवित्र तुलसी का पौधा, विष्णुप्रिया देवी के रूप में पूजित; कार्तिक में तुलसी विवाह होता है।
श्री तुलसी चालीसा का अर्थ क्या है?
तुलसी की स्तुति विष्णुप्रिया के रूप में है, जिनके बिना विष्णु-पूजा अधूरी है, जो औषधि रूप हैं और विशेषकर कार्तिक मास में सौभाग्य देती हैं। चालीसा बार-बार "नमो नमो" से उन्हें प्रणाम करती है और अन्त में पूजा-विधि बताती है: गंगाजल से स्नान, चन्दन, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप और चालीसा पाठ।
श्री तुलसी चालीसा का स्रोत क्या है?
पारम्परिक भक्ति पाठ (प्रचलित मुद्रित एवं मौखिक रूप) — Shri Tulsi Chalisa. परम्परा: वैष्णव।
क्या श्री तुलसी चालीसा के अलग-अलग संस्करण हैं?
चालीसा की मुद्रित प्रतियों में वर्तनी, कुछ शब्दों और कभी-कभी पदों के क्रम में अन्तर मिलता है। यह पाठ टिप्पणी में बताई प्रति पर आधारित है।