भद्रा (विष्टि करण) का समय
अगले 30 दिनों की भद्रा, आरम्भ के समय भद्रा का वास और अवधि के दौरान होने वाले परिवर्तन सहित।
इस डिवाइस पर भद्रा रिमाइंडर चालू हैं। सभी रिमाइंडर प्रबंधित करें
शनिवार, 7 नवंबर 2026 से रविवार, 6 दिसंबर 2026 तक
गणना से प्राप्त तथ्य
भद्रा विष्टि करण है। करण तिथि का आधा भाग (चन्द्र–सूर्य अन्तर के 6°) होता है, और विष्टि एक चान्द्र मास में लगभग आठ बार आता है। आरम्भ और समाप्ति का समय चुने गए स्थान के समय क्षेत्र के अनुसार खगोलीय गणना से निकाला गया है।
-
प्रारम्भ07/11/2026 (शनि)समाप्ति07/11/2026 (शनि)
-
प्रारम्भ13/11/2026 (शुक्र)समाप्ति13/11/2026 (शुक्र)
-
प्रारम्भ17/11/2026 (मंगल)समाप्ति17/11/2026 (मंगल)
-
प्रारम्भ20/11/2026 (शुक्र)समाप्ति21/11/2026 (शनि)
-
प्रारम्भ23/11/2026 (सोम)समाप्ति24/11/2026 (मंगल)
-
प्रारम्भ26/11/2026 (गुरु)समाप्ति27/11/2026 (शुक्र)
-
प्रारम्भ30/11/2026 (सोम)समाप्ति30/11/2026 (सोम)
-
प्रारम्भ03/12/2026 (गुरु)समाप्ति03/12/2026 (गुरु)
पारम्परिक व्याख्या
परम्परा के अनुसार चन्द्रमा कर्क, सिंह, कुम्भ या मीन में हो तो भद्रा का वास भूलोक (पृथ्वी) पर, मेष, वृषभ, मिथुन या वृश्चिक में हो तो स्वर्ग में, और कन्या, तुला, धनु या मकर में हो तो पाताल में माना जाता है। पृथ्वी पर वास करने वाली भद्रा को सामान्यतः सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
भद्रा विष्टि करण है (गणना द्वारा निकाला गया अर्ध-तिथि काल)। अनेक परम्पराएँ भद्रा में, विशेषकर भूलोक वास (चन्द्रमा कर्क, सिंह, कुम्भ या मीन में) होने पर, शुभ कार्य आरम्भ नहीं करतीं; कुछ स्वर्ग या पाताल वास में कार्य की अनुमति देती हैं।
जिन त्योहारों के नियम में भद्रा वर्जित है, जैसे रक्षा बन्धन और होलिका दहन, उनके पृष्ठों पर समय अवधि स्वतः भद्रा रहित दिखाई जाती है।
परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।
अन्य हिन्दू पंचांग सूचियाँ
व्रत, एकादशी, श्राद्ध, संक्रान्ति और ध्यान रखने योग्य काल — सब आपके स्थान के लिए गणित।