आगामी व्रत तिथियाँ
अगले 90 दिनों के मासिक और वार्षिक व्रत — प्रत्येक तिथि निर्धारित करने वाले काल और जहाँ लागू हो वहाँ पारण समय सहित।
इस डिवाइस पर पूर्णिमा और अमावस्या रिमाइंडर चालू हैं। सभी रिमाइंडर प्रबंधित करें
मासिक व्रत
ये व्रत हर चान्द्र मास में आते हैं। प्रत्येक एक विशेष तिथि के दिन के एक विशेष काल में व्याप्त होने से निश्चित होता है।
- सोमवार, 9 नवंबर 2026
- शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026
- शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
- मंगलवार, 17 नवंबर 2026
- शनिवार, 7 नवंबर 2026
- शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
- रविवार, 22 नवंबर 2026
- मंगलवार, 24 नवंबर 2026
- शुक्रवार, 27 नवंबर 2026
- शुक्रवार, 13 नवंबर 2026
अगले 90 दिन
शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 से बुधवार, 3 फ़रवरी 2027 तक
नवंबर 2026कुल 9
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शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
प्रदोष व्रत (कृष्ण)
- प्रदोष काल से 2 घं 33 मि
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शनिवार, 7 नवंबर 2026
मासिक शिवरात्रि
- निशीथ काल से 0 घं 51 मि
-
सोमवार, 9 नवंबर 2026
3 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 09/11/2026 (सोम)
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शुक्रवार, 13 नवंबर 2026
विनायक चतुर्थी
- मध्याह्न से 2 घं 14 मि
7 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 13/11/2026 (शुक्र) -
मंगलवार, 17 नवंबर 2026
11 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 17/11/2026 (मंगल)
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शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी
पारण से
14 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 20/11/2026 (शुक्र) -
रविवार, 22 नवंबर 2026
प्रदोष व्रत (शुक्ल)
- प्रदोष काल से 2 घं 36 मि
16 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 22/11/2026 (रवि) -
मंगलवार, 24 नवंबर 2026
18 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 24/11/2026 (मंगल)
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शुक्रवार, 27 नवंबर 2026
संकष्टी चतुर्थी
- चन्द्रोदय
21 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 27/11/2026 (शुक्र)
दिसंबर 2026कुल 6
-
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026
उत्पन्ना एकादशी
पारण से
28 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 04/12/2026 (शुक्र) -
रविवार, 6 दिसंबर 2026
प्रदोष व्रत (कृष्ण)
- प्रदोष काल से 2 घं 38 मि
30 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 06/12/2026 (रवि) -
सोमवार, 7 दिसंबर 2026
मासिक शिवरात्रि
- निशीथ काल से 0 घं 53 मि
31 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 07/12/2026 (सोम) -
मंगलवार, 8 दिसंबर 2026
32 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 08/12/2026 (मंगल)
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रविवार, 13 दिसंबर 2026
विनायक चतुर्थी
- मध्याह्न से 2 घं 10 मि
37 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 13/12/2026 (रवि) -
गुरुवार, 17 दिसंबर 2026
41 दिन बाद इस दिन का पंचांग: 17/12/2026 (गुरु)
अन्य हिन्दू पंचांग सूचियाँ
व्रत, एकादशी, श्राद्ध, संक्रान्ति और ध्यान रखने योग्य काल — सब आपके स्थान के लिए गणित।
ये तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं
प्रत्येक व्रत उस दिन होता है जिस दिन उसकी तिथि आवश्यक काल में व्याप्त हो (जैसे प्रदोष व्रत के लिए प्रदोष काल में त्रयोदशी, संकष्टी के लिए चन्द्रोदय के समय कृष्ण चतुर्थी, मासिक शिवरात्रि के लिए निशीथ काल में कृष्ण चतुर्दशी)। पूर्णिमा और अमावस्या सूर्योदय की तिथि से दिखाई गई हैं।
परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।