इस माह के शुभ दिन
प्रयोजन और माह चुनें। हर दिन उस प्रयोजन के मुहूर्त नियमों से रंगा जाता है (शुभ, मिश्रित या वर्जित) और खोलने पर उसके श्रेष्ठ समय व कारण दिखते हैं। ताराबल और चन्द्रबल के लिए अपनी चन्द्र राशि और नक्षत्र जोड़ें।
यात्रा · नवंबर 2026
प्रयुक्त नियम: यात्रा मुहूर्त
यात्रा की दिशा के बिना दिशाशूल और दक्षिण यात्रा का पंचक नहीं जाँचे जाते; इन्हें शामिल करने के लिए दिशा चुनें।
इस समूह का प्रत्येक नियम प्लेटफ़ॉर्म की ज्योतिष समीक्षा में उत्तीर्ण है: शास्त्रीय ग्रन्थों और प्रकाशित पंचांगों के आधार पर हर नियम की स्वचालित (AI) समीक्षा।
लागू नियम: यात्रा मुहूर्त
अनिवार्य (जिस दिन ये हर घड़ी रोकें, वह "वर्जित" है)
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती
- यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित
- यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो
- रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित
- राहु काल वर्जित
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
- चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल
- पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं
वांछनीय (जिस समय में इनमें से कोई न सधे, वह "मिश्रित" है)
- यमगण्ड से बचें
- गुलिक काल से बचें
- दुर्मुहूर्त से बचें
- वर्ज्यम से बचें
- अशुभ योगों से बचें (विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति)
- चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल
Muhurta Chintamani nakshatra/tithi/vara selections as commonly cited by modern Panchangs
- शुभ (9) कम से कम एक समय प्रयोजन के हर नियम पर खरा है
- मिश्रित (3) समय हैं, पर हर एक में कोई वांछनीय नियम नहीं सधता
- वर्जित (18) कोई अनिवार्य नियम पूरा दिन रोकता है
| रवि | सोम | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 शुभ | 2 वर्जित | 3 वर्जित | 4 वर्जित | 5 वर्जित | 6 शुभ | 7 वर्जित |
| 8 वर्जित | 9 वर्जित | 10 शुभ | 11 मिश्रित | 12 वर्जित | 13 वर्जित | 14 वर्जित |
| 15 मिश्रित | 16 शुभ | 17 वर्जित | 18 वर्जित | 19 वर्जित | 20 वर्जित | 21 मिश्रित |
| 22 शुभ | 23 वर्जित | 24 वर्जित | 25 शुभ | 26 शुभ | 27 शुभ | 28 शुभ |
| 29 वर्जित | 30 वर्जित |
कैलेंडर फ़ाइल में इस स्थान के समय क्षेत्र में केवल आगे आने वाले शुभ समय हैं। साझा लिंक में प्रयोजन, माह, स्थान और, यदि चुने हों, केवल चन्द्र राशि व नक्षत्र के कोड होते हैं।
01/11/2026 (रवि) शुभ से
श्रेष्ठ समय
-
से शुभ
- तिथि कृष्ण पक्ष सप्तमी
- नक्षत्र पुष्य
- योग साध्य
- करण बव
- वार रविवार
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमान्त) · कार्तिक कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि कृष्ण पक्ष सप्तमी
- नक्षत्र पुष्य
- योग साध्य → शुभ
- करण बव
- वार रविवार
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमान्त) · कार्तिक कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
न सधने वाले (वांछनीय): यमगण्ड से बचें (समय के कुछ भाग में); वर्ज्यम से बचें (समय के कुछ भाग में)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
02/11/2026 (सोम) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित (अनिवार्य)
- यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
03/11/2026 (मंगल) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
04/11/2026 (बुध) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
05/11/2026 (गुरु) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
06/11/2026 (शुक्र) शुभ से
श्रेष्ठ समय
-
से शुभ
- तिथि कृष्ण पक्ष त्रयोदशी
- नक्षत्र हस्त
- योग प्रीति
- करण वणिज
- वार शुक्रवार
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमान्त) · कार्तिक कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि कृष्ण पक्ष त्रयोदशी
- नक्षत्र हस्त
- योग विष्कम्भ
- करण गर
- वार शुक्रवार
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमान्त) · कार्तिक कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
न सधने वाले (वांछनीय): अशुभ योगों से बचें (विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि कृष्ण पक्ष त्रयोदशी
- नक्षत्र हस्त
- योग विष्कम्भ
- करण गर → वणिज
- वार शुक्रवार
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमान्त) · कार्तिक कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
न सधने वाले (वांछनीय): दुर्मुहूर्त से बचें (समय के कुछ भाग में); वर्ज्यम से बचें (समय के कुछ भाग में); अशुभ योगों से बचें (विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति); यमगण्ड से बचें (समय के कुछ भाग में)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
07/11/2026 (शनि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
08/11/2026 (रवि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
09/11/2026 (सोम) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित (अनिवार्य)
- रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
10/11/2026 (मंगल) शुभ से
श्रेष्ठ समय
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र अनुराधा
- योग शोभन
- करण बालव
- वार मंगलवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र अनुराधा
- योग शोभन
- करण बालव → कौलव
- वार मंगलवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र अनुराधा
- योग अतिगण्ड
- करण कौलव
- वार मंगलवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): अशुभ योगों से बचें (विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
दिन के सभी समय (5)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र अनुराधा
- योग शोभन
- करण बालव
- वार मंगलवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): वर्ज्यम से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र अनुराधा
- योग शोभन
- करण बालव
- वार मंगलवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): दुर्मुहूर्त से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
11/11/2026 (बुध) मिश्रित से
श्रेष्ठ समय
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र अनुराधा
- योग अतिगण्ड
- करण कौलव
- वार बुधवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): अशुभ योगों से बचें (विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति); यमगण्ड से बचें (समय के कुछ भाग में); गुलिक काल से बचें (समय के कुछ भाग में)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
12/11/2026 (गुरु) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
13/11/2026 (शुक्र) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
14/11/2026 (शनि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
15/11/2026 (रवि) मिश्रित से
श्रेष्ठ समय
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष सप्तमी
- नक्षत्र श्रवण
- योग गण्ड
- करण गर
- वार रविवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): अशुभ योगों से बचें (विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति); वर्ज्यम से बचें (समय के कुछ भाग में)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
16/11/2026 (सोम) शुभ से
श्रेष्ठ समय
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष सप्तमी
- नक्षत्र श्रवण → धनिष्ठा
- योग वृद्धि
- करण वणिज
- वार सोमवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष सप्तमी
- नक्षत्र श्रवण
- योग वृद्धि
- करण गर
- वार सोमवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष सप्तमी
- नक्षत्र श्रवण
- योग वृद्धि
- करण गर
- वार सोमवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
दिन के सभी समय (8)
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष सप्तमी
- नक्षत्र श्रवण
- योग वृद्धि
- करण गर
- वार सोमवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष सप्तमी
- नक्षत्र श्रवण
- योग वृद्धि
- करण गर
- वार सोमवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): यमगण्ड से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष सप्तमी
- नक्षत्र श्रवण
- योग वृद्धि
- करण गर
- वार सोमवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): गुलिक काल से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष सप्तमी
- नक्षत्र श्रवण
- योग वृद्धि
- करण गर
- वार सोमवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): दुर्मुहूर्त से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष सप्तमी
- नक्षत्र श्रवण
- योग वृद्धि
- करण वणिज
- वार सोमवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): दुर्मुहूर्त से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
17/11/2026 (मंगल) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
18/11/2026 (बुध) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
19/11/2026 (गुरु) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
- रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित (अनिवार्य)
20/11/2026 (शुक्र) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
- यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित (अनिवार्य)
21/11/2026 (शनि) मिश्रित से
श्रेष्ठ समय
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष त्रयोदशी
- नक्षत्र रेवती → अश्विनी
- योग व्यतीपात
- करण कौलव
- वार शनिवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): अशुभ योगों से बचें (विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
22/11/2026 (रवि) शुभ से
श्रेष्ठ समय
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष त्रयोदशी
- नक्षत्र अश्विनी
- योग वरीयान
- करण तैतिल
- वार रविवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष त्रयोदशी
- नक्षत्र अश्विनी
- योग वरीयान
- करण तैतिल
- वार रविवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष त्रयोदशी
- नक्षत्र अश्विनी
- योग व्यतीपात
- करण तैतिल
- वार रविवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): अशुभ योगों से बचें (विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
दिन के सभी समय (5)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष त्रयोदशी
- नक्षत्र अश्विनी
- योग वरीयान
- करण तैतिल
- वार रविवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): वर्ज्यम से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष त्रयोदशी
- नक्षत्र अश्विनी
- योग व्यतीपात
- करण कौलव → तैतिल
- वार रविवार
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): अशुभ योगों से बचें (विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति); यमगण्ड से बचें (समय के कुछ भाग में); गुलिक काल से बचें (समय के कुछ भाग में)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
23/11/2026 (सोम) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित (अनिवार्य)
24/11/2026 (मंगल) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
25/11/2026 (बुध) शुभ से
श्रेष्ठ समय
-
से शुभ
- तिथि कृष्ण पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र मृगशिरा
- योग सिद्ध
- करण तैतिल
- वार बुधवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से शुभ
- तिथि कृष्ण पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र मृगशिरा
- योग सिद्ध
- करण तैतिल → गर
- वार बुधवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि कृष्ण पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र मृगशिरा
- योग सिद्ध
- करण तैतिल
- वार बुधवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
न सधने वाले (वांछनीय): वर्ज्यम से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
26/11/2026 (गुरु) शुभ से
श्रेष्ठ समय
-
से शुभ
- तिथि कृष्ण पक्ष द्वितीया → कृष्ण पक्ष तृतीया
- नक्षत्र मृगशिरा
- योग साध्य
- करण गर → वणिज
- वार गुरुवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से शुभ
- तिथि कृष्ण पक्ष तृतीया
- नक्षत्र मृगशिरा
- योग साध्य
- करण वणिज
- वार गुरुवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से शुभ
- तिथि कृष्ण पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र मृगशिरा
- योग साध्य
- करण गर
- वार गुरुवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
दिन के सभी समय (6)
-
से मिश्रित
- तिथि कृष्ण पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र मृगशिरा
- योग सिद्ध → साध्य
- करण गर
- वार गुरुवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
न सधने वाले (वांछनीय): यमगण्ड से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि कृष्ण पक्ष तृतीया
- नक्षत्र मृगशिरा
- योग साध्य
- करण वणिज
- वार गुरुवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
न सधने वाले (वांछनीय): दुर्मुहूर्त से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि कृष्ण पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र मृगशिरा
- योग साध्य
- करण गर
- वार गुरुवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
न सधने वाले (वांछनीय): गुलिक काल से बचें; दुर्मुहूर्त से बचें (समय के कुछ भाग में)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
27/11/2026 (शुक्र) शुभ से
श्रेष्ठ समय
-
से शुभ
- तिथि कृष्ण पक्ष पंचमी
- नक्षत्र पुनर्वसु
- योग शुक्ल
- करण कौलव
- वार शुक्रवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
28/11/2026 (शनि) शुभ से
श्रेष्ठ समय
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से शुभ
- तिथि कृष्ण पक्ष पंचमी
- नक्षत्र पुष्य
- योग ब्रह्म
- करण तैतिल
- वार शनिवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
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से शुभ
- तिथि कृष्ण पक्ष पंचमी
- नक्षत्र पुष्य
- योग शुक्ल
- करण कौलव → तैतिल
- वार शनिवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
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से शुभ
- तिथि कृष्ण पक्ष पंचमी
- नक्षत्र पुनर्वसु → पुष्य
- योग शुक्ल
- करण कौलव
- वार शनिवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
दिन के सभी समय (7)
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से शुभ
- तिथि कृष्ण पक्ष पंचमी
- नक्षत्र पुनर्वसु
- योग शुक्ल
- करण कौलव
- वार शनिवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
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से मिश्रित
- तिथि कृष्ण पक्ष पंचमी
- नक्षत्र पुष्य
- योग शुक्ल → ब्रह्म
- करण तैतिल
- वार शनिवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
न सधने वाले (वांछनीय): वर्ज्यम से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
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से मिश्रित
- तिथि कृष्ण पक्ष पंचमी
- नक्षत्र पुष्य
- योग शुक्ल
- करण कौलव
- वार शनिवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
न सधने वाले (वांछनीय): यमगण्ड से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
-
से मिश्रित
- तिथि कृष्ण पक्ष पंचमी
- नक्षत्र पुनर्वसु
- योग शुक्ल
- करण कौलव
- वार शनिवार
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
न सधने वाले (वांछनीय): गुलिक काल से बचें; दुर्मुहूर्त से बचें
सधते नियम: यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती; यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित; रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) और अमावस्या वर्जित; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
जाँचा नहीं गया: यात्रा की दिशा में दिशाशूल न हो (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय); पंचक (धनिष्ठा-पंचक) में दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं (अनिवार्य)
29/11/2026 (रवि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
30/11/2026 (सोम) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- यात्रा नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती (अनिवार्य)
- यात्रा तिथि: किसी भी पक्ष की षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी तथा शुक्ल प्रतिपदा व पूर्णिमा वर्जित (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
यहाँ हर दिन साथ दिए गए मुहूर्त नियमों से गणना किया गया परम्परागत संकेत है, भविष्यवाणी नहीं। ये समय अवधियाँ चुने गए स्थान और गणना प्रोफ़ाइल के लिए इस पृष्ठ पर दिए नियमों के अनुसार हैं। यही एकमात्र सही मुहूर्त नहीं है: परम्परा, क्षेत्र और व्यक्तिगत कुण्डली के अनुसार अलग चयन भी हो सकता है। बड़े संस्कारों के लिए योग्य पुरोहित या ज्योतिषी से परामर्श करें।
परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।
गणना: इंजन 1.4.2 · नियम rules-2026-10-21-2ab12b5d · प्रोफ़ाइल north-lahiri-calibrated v1 · अयनांश lahiri_drik_compat · astronomy-engine@2.1.19 · Asia/Kolkata