इस माह के शुभ दिन
प्रयोजन और माह चुनें। हर दिन उस प्रयोजन के मुहूर्त नियमों से रंगा जाता है (शुभ, मिश्रित या वर्जित) और खोलने पर उसके श्रेष्ठ समय व कारण दिखते हैं। ताराबल और चन्द्रबल के लिए अपनी चन्द्र राशि और नक्षत्र जोड़ें।
विद्यारम्भ · अक्टूबर 2026
प्रयुक्त नियम: विद्यारम्भ / अक्षरारम्भ मुहूर्त
इस समूह का प्रत्येक नियम प्लेटफ़ॉर्म की ज्योतिष समीक्षा में उत्तीर्ण है: शास्त्रीय ग्रन्थों और प्रकाशित पंचांगों के आधार पर हर नियम की स्वचालित (AI) समीक्षा।
लागू नियम: विद्यारम्भ / अक्षरारम्भ मुहूर्त
अनिवार्य (जिस दिन ये हर घड़ी रोकें, वह "वर्जित" है)
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12
- राहु काल वर्जित
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित
- व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
- चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल
वांछनीय (जिस समय में इनमें से कोई न सधे, वह "मिश्रित" है)
- अनुकूल वार
- यमगण्ड से बचें
- गुलिक काल से बचें
- दुर्मुहूर्त से बचें
- वर्ज्यम से बचें
- विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र व परिघ योग से बचें (शास्त्रतः केवल आरम्भ की घटियाँ; पूरा योग चिह्नित)
- चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल
Muhurta Chintamani nakshatra/tithi/vara selections as commonly cited by modern Panchangs
- शुभ (3) कम से कम एक समय प्रयोजन के हर नियम पर खरा है
- मिश्रित (3) समय हैं, पर हर एक में कोई वांछनीय नियम नहीं सधता
- वर्जित (25) कोई अनिवार्य नियम पूरा दिन रोकता है
| रवि | सोम | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 वर्जित | 2 वर्जित | 3 वर्जित | ||||
| 4 वर्जित | 5 वर्जित | 6 वर्जित | 7 वर्जित | 8 वर्जित | 9 वर्जित | 10 वर्जित |
| 11 वर्जित | 12 मिश्रित | 13 वर्जित | 14 वर्जित | 15 वर्जित | 16 शुभ | 17 वर्जित |
| 18 वर्जित | 19 वर्जित | 20 मिश्रित | 21 मिश्रित | 22 शुभ | 23 शुभ | 24 वर्जित |
| 25 वर्जित | 26 वर्जित | 27 वर्जित | 28 वर्जित | 29 वर्जित | 30 वर्जित | 31 वर्जित |
कैलेंडर फ़ाइल में इस स्थान के समय क्षेत्र में केवल आगे आने वाले शुभ समय हैं। साझा लिंक में प्रयोजन, माह, स्थान और, यदि चुने हों, केवल चन्द्र राशि व नक्षत्र के कोड होते हैं।
01/10/2026 (गुरु) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित) (अनिवार्य)
02/10/2026 (शुक्र) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित) (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
03/10/2026 (शनि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
04/10/2026 (रवि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
05/10/2026 (सोम) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
06/10/2026 (मंगल) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
07/10/2026 (बुध) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
08/10/2026 (गुरु) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
09/10/2026 (शुक्र) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
10/10/2026 (शनि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित) (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
11/10/2026 (रवि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित) (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
12/10/2026 (सोम) मिश्रित से
श्रेष्ठ समय
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र स्वाती
- योग विष्कम्भ
- करण बालव
- वार सोमवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): अनुकूल वार; विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र व परिघ योग से बचें (शास्त्रतः केवल आरम्भ की घटियाँ; पूरा योग चिह्नित)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र स्वाती
- योग विष्कम्भ
- करण कौलव
- वार सोमवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): अनुकूल वार; दुर्मुहूर्त से बचें (समय के कुछ भाग में); विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र व परिघ योग से बचें (शास्त्रतः केवल आरम्भ की घटियाँ; पूरा योग चिह्नित)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र स्वाती
- योग विष्कम्भ
- करण कौलव
- वार सोमवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): अनुकूल वार; गुलिक काल से बचें; विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र व परिघ योग से बचें (शास्त्रतः केवल आरम्भ की घटियाँ; पूरा योग चिह्नित)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
दिन के सभी समय (4)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वितीया
- नक्षत्र स्वाती
- योग विष्कम्भ
- करण बालव → कौलव
- वार सोमवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): अनुकूल वार; विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र व परिघ योग से बचें (शास्त्रतः केवल आरम्भ की घटियाँ; पूरा योग चिह्नित); यमगण्ड से बचें (समय के कुछ भाग में); दुर्मुहूर्त से बचें (समय के कुछ भाग में)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
13/10/2026 (मंगल) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
14/10/2026 (बुध) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
15/10/2026 (गुरु) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
16/10/2026 (शुक्र) शुभ से
श्रेष्ठ समय
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष षष्ठी
- नक्षत्र मूल
- योग शोभन
- करण कौलव
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष षष्ठी
- नक्षत्र मूल
- योग शोभन
- करण तैतिल
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष षष्ठी
- नक्षत्र मूल
- योग शोभन
- करण कौलव
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
दिन के सभी समय (8)
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष षष्ठी
- नक्षत्र मूल
- योग शोभन
- करण कौलव
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष षष्ठी
- नक्षत्र मूल
- योग शोभन
- करण कौलव
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष षष्ठी
- नक्षत्र मूल
- योग शोभन
- करण कौलव → तैतिल
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): यमगण्ड से बचें
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष षष्ठी
- नक्षत्र मूल
- योग शोभन
- करण कौलव
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): दुर्मुहूर्त से बचें
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष षष्ठी
- नक्षत्र मूल
- योग शोभन
- करण कौलव
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): गुलिक काल से बचें; दुर्मुहूर्त से बचें (समय के कुछ भाग में)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
17/10/2026 (शनि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
18/10/2026 (रवि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
19/10/2026 (सोम) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
20/10/2026 (मंगल) मिश्रित से
श्रेष्ठ समय
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष दशमी
- नक्षत्र श्रवण → धनिष्ठा
- योग शूल
- करण तैतिल
- वार मंगलवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): अनुकूल वार; विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र व परिघ योग से बचें (शास्त्रतः केवल आरम्भ की घटियाँ; पूरा योग चिह्नित)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष दशमी
- नक्षत्र श्रवण
- योग शूल
- करण तैतिल
- वार मंगलवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): अनुकूल वार; गुलिक काल से बचें (समय के कुछ भाग में); विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र व परिघ योग से बचें (शास्त्रतः केवल आरम्भ की घटियाँ; पूरा योग चिह्नित)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
21/10/2026 (बुध) मिश्रित से
श्रेष्ठ समय
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष दशमी → शुक्ल पक्ष एकादशी
- नक्षत्र धनिष्ठा
- योग गण्ड
- करण गर → वणिज
- वार बुधवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र व परिघ योग से बचें (शास्त्रतः केवल आरम्भ की घटियाँ; पूरा योग चिह्नित)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष दशमी
- नक्षत्र धनिष्ठा
- योग गण्ड
- करण गर
- वार बुधवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र व परिघ योग से बचें (शास्त्रतः केवल आरम्भ की घटियाँ; पूरा योग चिह्नित); यमगण्ड से बचें (समय के कुछ भाग में); गुलिक काल से बचें (समय के कुछ भाग में); दुर्मुहूर्त से बचें (समय के कुछ भाग में)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
22/10/2026 (गुरु) शुभ से
श्रेष्ठ समय
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वादशी
- नक्षत्र शतभिषा
- योग वृद्धि
- करण बव
- वार गुरुवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वादशी
- नक्षत्र शतभिषा
- योग वृद्धि
- करण बव
- वार गुरुवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): दुर्मुहूर्त से बचें
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
23/10/2026 (शुक्र) शुभ से
श्रेष्ठ समय
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वादशी
- नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद
- योग ध्रुव
- करण बालव
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वादशी
- नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद
- योग ध्रुव
- करण बालव
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वादशी
- नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद
- योग ध्रुव
- करण बालव
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
दिन के सभी समय (6)
-
से शुभ
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वादशी
- नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद
- योग ध्रुव
- करण बालव
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वादशी
- नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद
- योग ध्रुव
- करण बालव
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): दुर्मुहूर्त से बचें
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
-
से मिश्रित
- तिथि शुक्ल पक्ष द्वादशी
- नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद
- योग ध्रुव
- करण बालव
- वार शुक्रवार
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
न सधने वाले (वांछनीय): गुलिक काल से बचें; दुर्मुहूर्त से बचें (समय के कुछ भाग में)
सधते नियम: विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती; विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12; राहु काल वर्जित; भद्रा (विष्टि करण) वर्जित; व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित); केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त)
जाँचा नहीं गया: चयनित व्यक्ति(यों) के लिए तारा बल अनुकूल (अनिवार्य); चयनित व्यक्ति(यों) के लिए चन्द्र बल अनुकूल (वांछनीय)
24/10/2026 (शनि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
25/10/2026 (रवि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
26/10/2026 (सोम) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
27/10/2026 (मंगल) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- व्यतीपात या वैधृति योग में नहीं (सम्पूर्ण वर्जित) (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
28/10/2026 (बुध) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
29/10/2026 (गुरु) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- विद्यारम्भ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, तीनों पूर्वा, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
30/10/2026 (शुक्र) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
31/10/2026 (शनि) वर्जित
वर्जित होने का कारण
- विद्यारम्भ की तिथियाँ ही: शुक्ल 2, 3, 5, 6, 10, 11, 12 (अनिवार्य)
- केवल दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) (अनिवार्य)
- भद्रा (विष्टि करण) वर्जित (अनिवार्य)
- राहु काल वर्जित (अनिवार्य)
यहाँ हर दिन साथ दिए गए मुहूर्त नियमों से गणना किया गया परम्परागत संकेत है, भविष्यवाणी नहीं। ये समय अवधियाँ चुने गए स्थान और गणना प्रोफ़ाइल के लिए इस पृष्ठ पर दिए नियमों के अनुसार हैं। यही एकमात्र सही मुहूर्त नहीं है: परम्परा, क्षेत्र और व्यक्तिगत कुण्डली के अनुसार अलग चयन भी हो सकता है। बड़े संस्कारों के लिए योग्य पुरोहित या ज्योतिषी से परामर्श करें।
परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।
गणना: इंजन 1.4.2 · नियम rules-2026-10-21-2ab12b5d · प्रोफ़ाइल north-lahiri-calibrated v1 · अयनांश lahiri_drik_compat · astronomy-engine@2.1.19 · Asia/Kolkata