सुब्रह्मण्य अष्टकम् (करावलम्ब स्तोत्र) Subrahmanya Ashtakam (Karavalamba Stotram)
भगवान सुब्रह्मण्य (कार्तिकेय, मुरुगन) के आठ श्लोक, हर श्लोक "वल्लीशनाथ मम देहि करावलम्बम्" पर समाप्त।
- देवता भगवान कार्तिकेय
- प्रकार अष्टकम्
- भाषा संस्कृत
- परम्परा स्मार्त
- स्रोत बृहत्स्तोत्ररत्नाकर, प्रथम भाग (1953) — Vol. 1, scan pages 128–130
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श्लोक 1
हे स्वामिनाथ करुणाकर दीनबन्धोhe svāminātha karuṇākara dīnabandho
श्रीपार्वतीशमुखपङ्कजपद्मबन्धो ।śrīpārvatīśamukhapaṅkajapadmabandho |
श्रीशादिदेवगणपूजितपादपद्मśrīśādidevagaṇapūjitapādapadma
वल्लीशनाथ मम देहि करावलम्बम् ॥ १ ॥vallīśanātha mama dehi karāvalambam || 1 ||
श्लोक 2
देवाधिदेवसुत देवगणाधिनाथdevādhidevasuta devagaṇādhinātha
देवेन्द्रवन्द्यमृदुपङ्कजमञ्जुपाद ।devendravandyamṛdupaṅkajamañjupāda |
देवर्षिनारदमुनीन्द्रसुगीतकीर्तेdevarṣināradamunīndrasugītakīrte
वल्लीशनाथ मम देहि करावलम्बम् ॥ २ ॥vallīśanātha mama dehi karāvalambam || 2 ||
श्लोक 3
नित्यान्नदाननिरताखिलरोगहारिन्nityānnadānaniratākhilarogahārin
भाग्यप्रदानपरिपूरितभक्तकाम ।bhāgyapradānaparipūritabhaktakāma |
श्रुत्यागमप्रणववाच्यनिजस्वरूपśrutyāgamapraṇavavācyanijasvarūpa
वल्लीशनाथ मम देहि करावलम्बम् ॥ ३ ॥vallīśanātha mama dehi karāvalambam || 3 ||
श्लोक 4
क्रौञ्चासुरेन्द्रपरिखण्डन शक्तिशूलkrauñcāsurendraparikhaṇḍana śaktiśūla
चापादिशस्त्रपरिमण्डितदिव्यपाणे ।cāpādiśastraparimaṇḍitadivyapāṇe |
श्रीकुण्डलीशधरतुण्डशिखीन्द्रवाहśrīkuṇḍalīśadharatuṇḍaśikhīndravāha
वल्लीशनाथ मम देहि करावलम्बम् ॥ ४ ॥vallīśanātha mama dehi karāvalambam || 4 ||
श्लोक 5
देवाधिदेवरथमण्डलमध्यवेद्यdevādhidevarathamaṇḍalamadhyavedya
देवेन्द्रपीठनकरं दृढचापहस्तम् ।devendrapīṭhanakaraṃ dṛḍhacāpahastam |
शूरं निहत्य सुरकोटिभिरीड्यमानśūraṃ nihatya surakoṭibhirīḍyamāna
वल्लीशनाथ मम देहि करावलम्बम् ॥ ५ ॥vallīśanātha mama dehi karāvalambam || 5 ||
श्लोक 6
हारादिरत्नमणियुक्तकिरीटहारhārādiratnamaṇiyuktakirīṭahāra
केयूरकुण्डललसत्कवचाभिराम ।keyūrakuṇḍalalasatkavacābhirāma |
हे वीर तारकजयामरवृन्दवन्द्यhe vīra tārakajayāmaravṛndavandya
वल्लीशनाथ मम देहि करावलम्बम् ॥ ६ ॥vallīśanātha mama dehi karāvalambam || 6 ||
श्लोक 7
पञ्चाक्षरादिमनुमन्त्रितगाङ्गतोयैःpañcākṣarādimanumantritagāṅgatoyaiḥ
पञ्चामृतैः प्रमुदितेन्द्रमुखैर्मुनीन्द्रैः ।pañcāmṛtaiḥ pramuditendramukhairmunīndraiḥ |
पट्टाभिषिक्तहरियुक्त परासनाथpaṭṭābhiṣiktahariyukta parāsanātha
वल्लीशनाथ मम देहि करावलम्बम् ॥ ७ ॥vallīśanātha mama dehi karāvalambam || 7 ||
श्लोक 8
श्रीकार्तिकेय करुणामृतपूर्णदृष्ट्याśrīkārtikeya karuṇāmṛtapūrṇadṛṣṭyā
कामादिरोगकलुषीकृतदुष्टचित्तम् ।kāmādirogakaluṣīkṛtaduṣṭacittam |
सिक्त्वा तु मामव कलाधरकान्तिकान्त्याsiktvā tu māmava kalādharakāntikāntyā
वल्लीशनाथ मम देहि करावलम्बम् ॥ ८ ॥vallīśanātha mama dehi karāvalambam || 8 ||
फलश्रुति 9
सुब्रह्मण्याष्टकं पुण्यं ये पठन्ति द्विजोत्तमाः ।subrahmaṇyāṣṭakaṃ puṇyaṃ ye paṭhanti dvijottamāḥ |
ते सर्वे मुक्तिमायान्ति सुब्रह्मण्यप्रसादतः ॥ ९ ॥te sarve muktimāyānti subrahmaṇyaprasādataḥ || 9 ||
फलश्रुति 10
सुब्रह्मण्याष्टकमिदं प्रातरुत्थाय यः पठेत् ।subrahmaṇyāṣṭakamidaṃ prātarutthāya yaḥ paṭhet |
कोटिजन्मकृतं पापं तत्क्षणादेव नश्यति ॥ १० ॥koṭijanmakṛtaṃ pāpaṃ tatkṣaṇādeva naśyati || 10 ||
पाठ: Brihat Stotra Ratnakara, vol. 1 (1953), pages 128–130 of the scanned edition, as transcribed and proofread on Sanskrit Wikisource (https://sa.wikisource.org/wiki/पृष्ठम्:बृहत्स्तोत्ररत्नाकरः_(प्रथमः_भागः).pdf/१२८)। 27 सितम्बर 2026 को हर पंक्ति का एक स्वतन्त्र प्रतिलिपि से मिलान किया गया (sanskritdocuments.org, केवल मिलान हेतु)। मेल खाती पंक्तियाँ: 22; संशोधित: 5; जहाँ स्रोतों में अन्तर है वहाँ संस्करण का पाठ रखा गया: 1।
रोमन पंक्ति देवनागरी से बना IAST लिप्यन्तरण है (ā = दीर्घ आ, ṃ = अनुस्वार, ḥ = विसर्ग, ś/ṣ = श/ष, c = च)। हिन्दी, अवधी और ब्रज पाठों में शब्द के अन्त का मौन 'अ' नहीं लिखा जाता। लिप्यन्तरण में वैदिक स्वर नहीं दिखते।
भगवान कार्तिकेय के और पाठ
इन्हीं अवसरों के लिए
प्रश्न
सुब्रह्मण्य अष्टकम् (करावलम्ब स्तोत्र) क्या है?
भगवान सुब्रह्मण्य (कार्तिकेय, मुरुगन) के आठ श्लोक, हर श्लोक "वल्लीशनाथ मम देहि करावलम्बम्" पर समाप्त।
सुब्रह्मण्य अष्टकम् (करावलम्ब स्तोत्र) किस देवता से जुड़ा है?
सुब्रह्मण्य अष्टकम् (करावलम्ब स्तोत्र) भगवान कार्तिकेय से जुड़ा है। शिव-पार्वती के पुत्र, देवसेनापति; तमिलनाडु में मुरुगन रूप में विशेष रूप से पूजित।
सुब्रह्मण्य अष्टकम् (करावलम्ब स्तोत्र) का अर्थ क्या है?
सुब्रह्मण्य को स्वामिनाथ, शिव-पार्वती के पुत्र, देवसेना के नायक, तारक और शूर के संहारक, शक्ति-आयुधधारी और मयूर-वाहन कहकर सम्बोधित किया गया है। हर श्लोक में भक्त वल्ली के स्वामी से हाथ का सहारा माँगता है। अन्तिम दो श्लोक कहते हैं कि प्रातः इसका पाठ पाप दूर करता है।
सुब्रह्मण्य अष्टकम् (करावलम्ब स्तोत्र) का स्रोत क्या है?
बृहत्स्तोत्ररत्नाकर, प्रथम भाग (1953) — Subrahmanyashtakam. परम्परा: स्मार्त।
क्या सुब्रह्मण्य अष्टकम् (करावलम्ब स्तोत्र) के अलग-अलग संस्करण हैं?
मुद्रित संस्करणों में कुछ शब्दों, श्लोक-संख्या और प्रारम्भिक व अन्तिम श्लोकों में अन्तर मिलता है। यह पाठ टिप्पणी में बताए संस्करण पर आधारित है; केवल वहीं बदलाव किया गया है जहाँ स्रोत प्रतिलिपि की भूल दिखाते हैं।